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जबलपुर. सोशल साइट्स पर दोस्ती सम्भल कर करें। यहां ठगी और बदनामी का बड़ा खतरा है। दोस्ती करने वाला अपनी पहचान छिपाकर करीबी लोगों को ही ब्लैकमेल करने लगता है। सोशल साइट्स खासकर फेसबुक लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। लोग इस पर खुद से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी और दिनचर्या से सम्बंधित बातें भी शेयर करते हैं। फोटो- स्टेटस लाइक और कमेंट पाने के लिए शेयर करते हैं। बाद में यही मुसीबत का कारण बन जाती हैं।
स्टेट साइबर सेल और थानों में रोज पहुंंच रहीं तीन से चार शिकायतें
85 प्रतिशत मामलों में करीबी और रिश्तेदार होते हैं आरोपी
case 01
01 अगस्त को भेड़ाघाट स्थित होटल मैनेजर ने रिश्तेदार युवती को फेसबुक पर फे्रंड रिक्वेस्ट भेजा, जिसे युवती ने रिजेक्ट कर दिया। ऐसा कई बार हुआ। इसके बाद वह युवती को फोन करने लगा। यहां भी बात नहीं बनी तो फोटोशॉप ऐप के माध्यम से उसकी और अपनी फोटो लगाकर फेक अकाउंट बनाकर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को टैग करने लगा।
case 02
03 जुलाई को सोशल साइट पर युवती बनकर दोस्ती करने वाले एक युवक ने दो सहेलियों को झांसे में फंसाया। उनकी फोटो से फेक आईडी बनाकर दोनों को कॉलगर्ल बताते हुए उनके मोबाइल नम्बर पोस्ट कर दिया। एक युवती की जॉब छूट गई। जबकि दूसरी युवती की पढ़ाई छूटते-छूटते बची। आरोपी आतिफ खान मुरादाबाद का रहने वाला है।
case 03
04 अप्रैल को शहर के अधिवक्ता चैतन्य सोनी को मुम्बई पुलिस ने युवती और उसकी 41 वर्षीय मां को परेशान करने के आरोप में गिरफ्तार किया। उसकी युवती
से फेसबुक पर दोस्ती हुई थी। बाद में उसने इंस्टाग्राम पर फर्जी अकाउंट बनाकर उसके आपत्तिजनक फोटो के आधार पर ब्लैकमेल करने लगा।
case 04
आनंद कुंज निवासी प्रेमनारायण (81) की वर्ष 2018 में फेसबुक पर विदेशी महिला से दोस्ती हुई। इसके बाद मैसेंजर पर उनकी बात होने लगीं। महिला ने खुद को यूके का बताया और भारत के साथ जबलपुर घूमने आने की सूचना दी। फिर मुम्बई एयरपोर्ट पर कस्टम में फंसने की फर्जी सूचना देकर 2.38 लाख रुपए ठग लिए।
ये सावधानी बरतें
- सोशल साइट्स पर मोबाइल नम्बर या निजी जानकारी शेयर नहीं करें।
- निजता की जांच कर लें, जिससे पोस्ट्स के साथ आपके प्रोफाइल की निजी जानकारी, फोन नम्बर, ई-मेल चुनिंदा या करीबी लोग ही देख सकें।
- पोस्ट करते समय दोस्तों, रिश्तेदारों या सार्वजनिक करने के विकल्प को चुनें।
- जन्म की तारीख डालने से बचें, अधिकतर लोग इसी के आधार पर पासवर्ड बनाते हैं।
- घर की लोकेशन शेयर न करें, यह सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है।
- बच्चों की फोटो पोस्ट न करें, इनका उपयोग फेक प्रोफाइल में किया जा रहा है।
- छुट्टी या घर से बाहर जाने की पोस्ट करने से बचें, इस जानकारी का उपयोग चोर कर सकते हैं।
स्टेट साइबर सेल और जिला पुलिस के पास फेक आईडी बनाने और सोशल साइट्स पर ब्लैकमेलिंग से सम्बंधित प्रतिदिन दो से तीन शिकायतें पहुंच रही हैं। सोशल साइट्स का सबसे अधिक प्रयोग युवा पीढ़ी कर रही है। बच्चे से लेकर 50 साल की उम्र वाले भी सोशल साइट्स पर सक्रिय हैं। सोशल साइट्स पर अधिक फ्रेंड का जुड़ा होना भी स्टेटस सिम्बल बनता जा रहा है। यही कारण है कि लोग बिना सोचे-विचारे किसी को भी फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज और स्वीकार कर लेते हैं।
पकड़ा जा चुका है सीरियल फेक प्रोफाइल मेकर-
स्टेट साइबर सेल ने 12 मई को एक युवक को गिरफ्तार किया था। युवक सीरियल फेक प्रोफाइल मेकर निकला। वह 15 युवतियों के फेक आईडी बनाकर ब्लैकमेल कर चुका था। निजी अस्पताल में फिजियोथैरेपिस्ट रह चुका युवक स्वयं को डॉक्टर बताकर सोशल साइट्स पर लड़कियों से दोस्ती करता था। उनसे करीबी रिश्ता बनाकर अंतरंग तस्वीर खींचता था। जब तक युवतियों को इसका पता चलता और वे उससे दूर जाने की कोशिश करती तो आरोपी फेक फेसबुक अकाउंट बनाकर उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें अपलोड कर बदनाम करने लगता था।
Published on:
05 Aug 2019 10:41 am

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