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खुशखबरी: मप्र में बेटों से ज्यादा जन्मीं बेटियां, हजार बेटों पर 1111 बेटियों का जन्म

नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे-5 : जिले में पांच साल में जन्म लेने वाले बच्चों में बढ़ गईं बेटियां  

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जबलपुर। बेटियों को लेकर एक अच्छी खबर है। जिले में जन्म लेने वाले शिशुओं में बेटों के मुकाबले बेटियों की संख्या बढ़ गई हैं। वर्ष 2020-21 की नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस)-5 की रिपोर्ट के अनुसार जिले में पांच साल में एक हजार बेटों पर 1111 बेटियों का जन्म रेकॉर्ड किया गया है। इससे पहले वर्ष 2015-16 में एनएफएचएस-4 में जिले में शिशुओं के जन्म के समय पर एक हजार बेटों पर 924 बेटियों का जन्म था।

पुरुष-महिला लिंगानुपात भी बेहतर हुआ
बेटियों की चाहत बढऩे के साथ ही नई रिपोर्ट में जिले में महिला-पुुरुष का लिंगानुपात में सुधार पाया गया है। वर्ष 2015-16 में प्रति एक हजार पुरुषों पर 955 महिलाओं का आंकड़ा था। ये अब पांच साल में बढकऱ वर्ष 2020-21 में प्रति एक हजार पुरुष पर 965 हो गया है। अच्छी बात यह है कि पांच साल में जन्म पंजीयन को लेकर भी जागरुकता बढ़ी है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों का सौ फीसदी जन्म पंजीयन स्थानीय निकाय में हुआ है। जबकि वर्ष 2015-16 में जन्म पंजीयन 92.8 प्रतिशत था।

महिला शिक्षा दर में भी बदलाव आया
जिले में पांच साल में प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है। लेकिन हाईस्कूल से आगे की पढ़ाई अभी भी ज्यादातर महिलाएं नहीं कर पा रही हैं। सर्वे के अनुसार 6 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र की कभी स्कूल नहीं जाने वाली महिलाओं की संख्या में कमी आई है। यह आंकड़ा वर्ष 2015-16 में 76.8 प्रतिशत था, जो 2020-21 में घटकर 70 प्रतिशत रह गया है। लेकिन आज भी महज 30.4 प्रतिशत महिलाएं ही ऐसी हैं, जो 10 वर्ष या इससे ज्यादा वर्षों की स्कूली शिक्षा प्राप्त कर पा रही हैं। इनका औसत वर्ष 2015-16 में 37.3 प्रतिशत था।

99.7 प्रतिशत घरों में पहुंची बिजली
एनएफएचएस-5 के अनुसार जिले में अब 99.7 प्रतिशत (वर्ष 2015-16 में 95.7 प्रतिशत था) घरों तक बिजली पहुंच गई है। घर पर बेहतर पेयजल स्त्रोत वाले परिवारों की संख्या भी बढकऱ 98 प्रतिशत (वर्ष 2015-16 में 96.4 प्रतिशत था) हुई है। घरों में सेनेटइजेशन को लेकर भी जागरुकता बढ़ी है। बेहतर स्वच्छता सुविधा वाले घरों का प्रतिशत पांच साल में 50.9 से बढकऱ 61.9 प्रतिशत हो गया है।