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मिशनरी को आवंटित 200 करोड़ की जमीन सरकारी घोषित, बिशप पर कसा शिकंजा

मिशनरी को आवंटित 200 करोड़ की जमीन सरकारी घोषित, बिशप पर कसा शिकंजा  

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जबलपुर. फर्जीवाड़े के मामले में जेल में बंद बिशप पीसी सिंह पर प्रशासन का भी शिकंजा कस गया है। क्रिश्चियन मिशनरी सोसायटी को आवंटित नेपियर टाउन की 200 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की 1.70 लाख वर्गफीट जमीन की लीज निरस्त कर सरकारी घोषित कर दी गई है। अब जिला प्रशासन इस जमीन पर कब्जे की प्रक्रिया शुरू करेगा। मिशनरी का संचालन करने वाले बिशप सिंह ने 23 साल से लीज का नवीनीकरण नहीं कराया था, उल्टे आवासीय प्रयोजन की जमीन पर कॉमर्शियल गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।

अपर कलेक्टर जबलपुर शेर सिंह मीणा की कोर्ट में चल रहे इस मामले से सामने आया कि यूनाइटेड क्रिश्चियन मिशनरी सोसायटी को शहर के सबसे पाश इलाके नेपियर टाउन में 170328 वर्ग फीट जमीन लीज पर आवंटित की गई थी। जिसकी लीज 1999 में खत्म हो गई थी। लेकिन सोसायटी का संचालन करने वाले बिशप पीसी सिंह ने 2018 में महज एक आवेदन कर चुप्पी साध ली थी।

कलेक्टर इलैया राजा टी के निर्देश पर गठित टीम की जांच में पता चला कि करोड़ों रुपए की इस बेशकीमती जमीन पर कॉमर्शियल गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। लीज की शर्तों के घोर उल्लंघन पर अपर कलेक्टर की कोर्ट ने शुक्रवार को लीज निरस्त कर रिकॉर्ड में मध्यप्रदेश शासन दर्ज करने का आदेश एसडीएम व तहसीलदार रांझी को दिए हैं। उक्त जमीन का कलेक्टर रेट साढ़े 7 हजार रुपए वर्गफीट है, जबकि बाजार मूल्य इसके दोगुने के बराबर है। बिशप सिंह पर पर मिशनरी की संपत्ति खुर्द-बुर्द करने और फर्जीवाड़ा का मामला ईओडब्लू ने दर्ज किया है और वर्तमान में वह जेल में है।

ऑफिस व मैरिज गार्डन बनाया
बिशप पीसी सिंह ने आवासीय प्रयोजन के लिए लीज पर मिली जमीन का पूरी तरह से स्वरूप ही बदल दिया था। राजस्व अधिकारियों की जांच रिपोर्ट के अनुसार इस जमीन पर बिशप सिंह ने भवन बनाकर भारतीय खाद्य निगम को किराए पर उठा दिया। इसी परिसर में मैरिज गार्डन चल रहा था, जिसे शादियों व दूसरे आयेाजनों के लिए बुकिंग पर दिया जा रहा था।

प्लॉट बेचे, खुद के नाम कराई जमीन
लीज पर आवंटित जमीन को लेकर बिशप सिंह की बड़ी जालसाजी भी सामने आई है। उसने रिकॉर्ड में हेरा-फेरी कर 42 लागों को प्लॉट बेच दिए और 6 हजार वर्गफीट के दो प्लॉट खुद के नाम भी रजिस्टर्ड करा लिया था। यह सभी जमीनें अब सरकारी दर्ज हो गई हैं।