
Officers doing working for the cabinet meeting on sunday
जबलपुर. रामपुर की पहाड़ी स्थित शक्ति भवन को पूरी तरह ग्रीनवेल सिस्टम बिल्डिंग बनाया जाएगा। इसके लिए शक्तिभवन के इंजीनियर ने शहर के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज के साथ मिलकर प्लान बनाया है। इस पर अगले छह माह में अमल शुरू हो सकता है। शक्ति भवन १७ करोड़ रुपए की लागत से १९ अगस्त १९८९ में अस्तित्व में आया। यह वास्तुकला का एक बेहतर नमूना है। तारापुर एंड कंपनी के दोशी एंड भल्ला आर्किटेक्ट ने प्राकृतिक रूप से मौजूद चट्टानों व पेड़ों को इस तरह से संजोया कि हरियाली अब भी बरकार है। वहीं छत पर सोलर पैनल से हर माह ५० हजार यूनिट बिजली भी जनरेट होती है। जिसके चलते इस भवन का चयन ग्रीनवेल सिस्टम बिल्डिंग बनाने के लिए किया गया है।
इस तरह किया जाएगा बदलाव
ऊर्जा और पानी बचाने पर जोर दिया जाएगा।
आसपास और पेड़-पौधे लगाए जाएंगे।
सूरज के उजाले का उपयोग भवन के अधिकांश हिस्सों में किया जाएगा।
इसके बाद देखा जाएगा कि कहां कितने वाट के बल्ब या ट्यूबलाइट जरूरी हैं।
लगातार हवा मिलने के लिए खिड़कियों में बदलाव।
बालकनी खिड़की, गैलरी, छत और ओपन टेरेस में भी गमलों में छोटे पौधे लगाए जाएंगे।
पानी बचत के लिए ये होगा
पानी बचत के लिए दो स्तर पर काम होगा। पहले में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से भू-जल स्तर को रिचार्जिंग और दूसरे में पानी के फिर से उपयोग पर जोर दिया जाएगा। सीवरेज ट्रीटमेंट में ड्यूल फ्लश लाइन का यूज किया जाएगा। जिससे फ्लश में इस्तेमाल पानी को ट्रीटमेंट के बाद वापस फ्लश और दूसरे छोटे कामों के उपयोग में लाया जा सके। दैनिक उपयोग के पानी को भी रिसायकिल किया जाएगा।
ये होगा लाभ
परम्परागत भवनों में 40 प्रतिशत बिजली की खपत और 24 प्रतिशत कार्बनडाई आक्साईड का उत्सर्जन होता है।
ग्रीनवेल सिस्टम आधारित भवन बनने के बाद 30 से 40 प्रतिशत बिजली और 30 से 70 प्रतिशत पानी की बचत होगी
प्राकृतिक ऊर्जा के उपयोग से यहां काम करने वालों का स्वास्थ्य अपेक्षाकृत अच्छा रहेगा। वेस्ट भी कम निकलेगा।
निर्माण क्षेत्र - 43,500 वर्गमीटर
लागत- १७ करोड़ रुपए
लोकापर्ण- 19 अगस्त 1989 में
शक्तिभवन की छत पर १५०० सोलर पैनल लगे
३५५ किलोवाट क्षमता है इन सोलर पैनलों की
हर महीने ५० हजार यूनिट बिजली होती है जनरेट
शक्ति भवन को प्रदेश का पहला शासकीय मॉडल ग्रीनवेल सिस्टम बिल्डिंग के तौर पर तैयार किया जाएगा। इसके लिए निजी इंजीनियरिंग कॉलेज का सहयोग लिया जाएगा। पावर मैनेजमेंट से मंजूरी मिलते ही अगले छह माह में इस पर काम शुरू होगा। नवनीत राठौर, कार्यपालन यंत्री
Published on:
18 Dec 2017 12:56 am
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