जीएसटी की छापा कार्रवाई, फर्म उपलब्ध नहीं करवा सकी दस्तावेज
जबलपुर। मसाला और सिगरेट कारोबारी के खिलाफ स्टेट जीएसटी एंटी इवेजन ब्यूरो की छापा कार्रवाई चौथे दिन भी जारी रही। यह जानकारी सामने आई कि कारोबारी की तरफ से बिक्री कम दिखाकर नाममात्र का टैक्स दिया जा रहा था। दूसरी तरफ सरकार पर देनदारी ज्यादा बताई यानी टैक्स से अधिक इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) लिया जा रहा था। इसमें कितनी गड़बड़ी की गई इसकी जांच अधिकारी कर रहे हैं।
गलगला में महावीर ट्रेडर्स की कार्रवाई के दौरान स्टॉक की जांच तो रविवार को पूरी हो गई थी। सोमवार को जब टीम ने फिर से कार्रवाई शुरू की। कुछ दस्तावेज कारोबारी की तरफ से नहीं दिए गए हैं। ऐसे में टैक्स और पेनल्टी की राशि तय नहीं हो पाई। अब मंगलवार को खरीदी-बिक्री से जुडे़ दस्तावेज मिलने पर आगे की कार्रवाई हो सकेगी। इस बीच टीम को इनपुट टैक्स क्रेडिट के संबंध में गड़बड़ी मिली।
अधिकारियों ने बताया कि खरीदी-बिक्री के बीच कारोबारी की तरफ से अभी तक नाममात्र का टैक्स जमा किया जा रहा था। उनकी तरफ से रिटर्न में बिक्री कम होने और माल का स्टॉक ज्यादा होने की जानकारी दी जा रही थी। इसलिए उन्होंने सरकार पर देनदारी दिखाई। कारोबारी की तरफ से माल खरीदी की गई। उस पर टैक्स चुकाया गया। लेकिन जब बिक्री की गई तो लाभ तो लिया लेकिन अपने हिस्से का टैक्स नहीं दिया जा रहा था। इसी आधार पर जीएसटी कार्यालय की तरफ से छापे की कार्रवाई की गई।
बालाघाट में सरेंडर हुए 55 लाख रुपए
इस बीच जबलपुर की टीम की ओर से बालाघाट में सौरभ ट्रेडर्स पर की गई छापा कार्रवाई सोमवार को पूरी हो गई। जांच में ट्रेडिंग अकाउंट की तुलना में स्टॉक शॉर्ट पाया गया, जिस पर टैक्स और पेनल्टी जमा कराई गई। कुछ लूज पेपर्स पाए गए। यह लेखा पुस्तकों में दर्ज नहीं थे। इन पर टैक्स और पेनल्टी जमा कराई गई। 49 लाख टैक्स और 6 लाख रुपए की पेनल्टी राशि जमा कराई गई। इस तरह करदाता से 55 लाख रुपए जमा कराए गए।