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गोविंद ठाकरे @ जबलपुर। नोटबंदी और जीएसटी के असर से बाहर निकलने के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था कसमसा रही है। वहीं टैक्स के जरिए खजाना भरने के लक्ष्य में सरकार लगातार पिछड़ रही है। आरटीआई सहित अन्य दस्तावेजों की पड़ताल से साफ है कि इसके लिए करदाता से कहीं ज्यादा विभाग खुद जिम्मेदार है। कर वसूली में सुधार और केंद्रीय परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में आर्थिक सहयोग करने वाला प्रमुख विभाग जीएसटी आयुक्त कार्यालय लंबे समय से अमले की भारी कमी से जूझ रहा है। अकेले जबलपुर जोन में 180 स्वीकृत पदों में 106 खाली हैं। इसका असर कर वसूली पर साफ दिख रहा है। मौजूदा वित्त वर्ष की समाप्ति तक जबलपुर जोन में जीएसटी का लक्ष्य 25 फीसदी बाकी रह गया है।
एक कर्मचारी पर पर तीन का भार
विभाग में हवलदार से लेकर कमिश्नर तक के करीब 286 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में पद संख्या करीब 180 है, जिसमें 106 पद खाली पड़े हैं। ऐसे में एक स्टाफ पर 2 से 3 स्टाफ का अतिरिक्त कार्यभार है। जीएसटी की ऑनलाइन प्रक्रिया है, लेकिन कौन सही समय पर जमा कर रहा है या नहीं इस पर निगरानी जरूरी है। रेंज अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह समय पर पूरा का काम करें। सेन्ट्रल जीएसटी के अंतर्गत आयुक्तालय में लगभग 35 हजार करदाता पंजीकृत हैं। अकेले जबलपुर शहरी क्षेत्र की बात की जाए तो इनकी संख्या 5 हजार के करीब है।
जीएसटी पर भारी सर्विस टैक्स
जीएसटी आयुक्तायल जबलपुर के अंतर्गत 19 जिले आते हैं। पांच-पांच रेंज वाली सात प्रमुख डिवीजन हैं। कुल मिलाकर 35 रेंज का संचालन हो रहा है। आयुक्तालय को वर्ष 2016-17 में करीब 6100 करोड़ राजस्व वसूली का लक्ष्य मिला था। इसमें सर्विस टैक्स के साथ सेंट्रल एक्साइज और सीमा शुल्क भी शामिल था। जुलाई 2017 तक एक्साइज और सर्विस टैक्स के रूप में लक्ष्य से दो हजार करोड़ से ज्यादा राजस्व जुटाया, लेकिन 2017-18 में जीएसटी को लेकर किसी भी तरह के निर्देश घोषित नहीं हैं। फिर भी यह मानकर चला जा रहा है कि बीते वर्षों के अनुरूप कर एकत्रित किया जाए।
कमी आ रही आड़े
विभागीय सूत्रों के मुताबिक जीएसटी के रूप में पिछले साल जुलाई से अब तक तीन हजार 500 करोड़ों राजस्व जुटाया जा चुका है। सीमा शुल्क आदि को मिलाकर 5 हजार 500 करोड़ एकत्रित किया गया है। बाकी की वसूली में अमले की कमी आड़े आ रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर बड़े पद भी रिक्त
सेंट्रल जीएसटी और सीमा शुल्क विभाग में प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर के 14 पदों में 11 खाली हैं। इसी तरह प्रिंसिपल कमिश्नर के 98 पदों में 72, एडीसी/जेसी के 931 पदों में 405 जबकि एसी/डीसी के 4371 पदों में से 1374 पद खाली हैं।
जनोपयोगी परियोजनाओं पर प्रभाव
जीएसटी लागू होने के बाद विभाग के काम का दायरा काफी बढ़ गया है। जीएसटी से ही देश को राजस्व की प्राप्ति होती है और जनोपयोगी परियोजनाओं को पूरा करने में आर्थिक मदद मिलती है। अमले की कमी इस महत्वपूर्ण कार्य में आड़े आ रही है।
- संजय थूल, आरटीआई एक्टिविस्ट
अमले की कमी से बढ़ रहा कार्यभार
पिछले सेंट्रल एक्साइज और सर्विस टैक्स के सामानांतर जीएसटी वसूलने की कार्रवाई की जा रही है। जहां तक खाली पदों का सवाल है तो वह समस्या तो है। कमी के कारण कार्यभार बढ़ता है। इन्हें भरने के लिए विभाग से पत्राचार होता है। कुछ पद भरे भी गए हैं।
- मनीष जायसवाल, संयुक्त आयुक्त, सेंट्रल जीएसटी
Published on:
15 Mar 2018 04:22 pm
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