
happy doctor day images in hindi
जबलपुर. जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत अब भी बदहाल है। शहर में बढ़ती आबादी के लिहाज से न तो अस्पतालों में सुविधा है और न विशेषज्ञ डॉक्टर्स ही हैं। अनुमान के मुताबिक जिले में चिकित्सक-व्यक्ति अनुपात लगभग 1:2031 है। यह निर्धारित मानक के दोगुने से भी अधिक है। सरकारी अस्पतालों की हालात और भी पतली है। वहां चिकित्सकों के कई पद खाली हैं। इसके चलते जितने डॉक्टर्स हैं, वह भी भारी दबाव में काम कर रहे हैं। डॉक्टर्स-डे के मौके पर पत्रिका की विशेष रिपोर्ट-
इन कारणों से नहीं बढ़ रही संख्या
- सरकारी अस्पतालों की स्थापना के वक्त करीब 30-40 वर्ष पहले चिकित्सक के जितने पद स्वीकृत किए गए थे, उनमें बढ़ती जनसंख्या के अनुसार वृद्धि नहीं हुई। जबकि, मरीज दोगुने से अधिक हो चुके हैं।
- नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीटें 140 से बढ़ाकर 150 करने में लगभग 20 साल लग गए। 10 सीट बढ़ाने में ही सालों गुजर जाने से और नई सीट एक्सटेंशन के प्रस्ताव ही नहीं बने।
- प्रदेश में लगभग छह दशक में 7 सरकारी मेडिकल कॉलेज ही खुल पाए। इन कॉलेजों में एमबीबीएस की केवल 900 सीटें हैं। 6 नए कॉलेज खोलने पर बढऩे वाली एमबीबीएस की 650 सीटों का प्रस्ताव भी अटका। शहर में एक मात्र प्राइवेट कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू हुई। लेकिन संसाधनों के अभाव में एक साल ही में मान्यता छिन गई। एक अन्य प्राइवेट कॉलेज का प्रस्ताव आकार लेने के पहले ही दम तोड़ चुका है।
स्थिति में बड़ा अंतर
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार देश में चिकित्सक-व्यक्ति (कुल जनसंख्या) के अनुपात में सुधार हुआ है। देश में पंजीकृत चिकित्सकों के अनुसार यह आंकड़ा 1:921 रह गया है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के आदर्श मानक 1:1000 से कम है। जानकारों का मानना है कि जिले में चिकित्सकों की संख्या बढऩे के बावजूद चिकित्सक-व्यक्ति अनुपात अब भी काफी अधिक है। जिले में करीब 16 सौ एलोपैथी चिकित्सक हैं। इसके मुताबिक जिले में चिकित्सक-व्यक्ति अनुपात 1:1625 है। माना जाता है कि निर्धारित संख्या में 80 प्रतिशत चिकित्सक ही प्रेक्टिस कर रहे हैं। इस लिहाज से चिकित्सक-व्यक्ति अनुपात 1:2031 माना गया है।
जांच से स्वास्थ्य तक प्रभावित
जिले में चिकित्सकों की संख्या निर्धारित मानक से कम होने का प्रभाव मरीजों की जांच से लेकर उनके स्वास्थ्य तक पर पड़ रहा है। जानकारों के अनुसार पर्याप्त संख्या में चिकित्सक नहीं होने से अतिरिक्त मरीजों की जांच का भार है। कामकाज के अधिक दबाव के चलते वह एक मरीज की जांच पर पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं। अधिक मरीज की जांच की हड़बड़ी में कई बार बड़ी चूक हो जाती है। इसके मरीज के स्वास्थ्य पर बुरा असर पडऩे का अंदेशा रहता है।
इसलिए चुना यह दिन
यूएस के हाउस ऑफ रिप्रज़ेंटेटिव्स ने 30 मार्च, 1958 को डॉक्टर्स डे रिज़ॉल्यूशन को अपनाया। देश में डॉक्टर्स डे के लिए 1 जुलाई का दिन तय किया गया। इसी दिन नामी फिजिशियन और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ. बिधान चंद्र रॉय का जन्म भी हुआ था। उन्हें देश के सर्वोच्च भारत रत्न से भी नवाज़ा गया था। उन्हीं के सम्मान में उनके जन्मदिन के दिन पूरे देश में डॉक्टर्स डे मनाया जाता है।
चिकित्सक-व्यक्ति अनुपात
आदर्श...
1 : 1000 (डब्ल्यूएचओ के अनुसार)
देश में...
1 : 921 (पंजीकृत चिकित्सक के अनुसार)
1 : 1596 (80 प्रतिशत चिकित्सक सक्रिय)
प्रदेश में...
1 : 2282 (पंजीकृत चिकित्सक के अनुसार)
1 : 2852 (80 प्रतिशत चिकित्सक सक्रिय)
जिले में...
1 : 1625 (पंजीकृत चिकित्सक के अनुसार)
1 : 2031 (80 प्रतिशत चिकित्सक सक्रिय)
(नोट: आंकड़े दिसंबर, 2017 के अनुसार)
Published on:
01 Jul 2018 10:20 am
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