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यहां भी अदने से अपराधी को पाला-पोसा, गैंगस्टर बनाकर सम्पत्ति हड़पी, फिर एनकाउंटर में दौड़ाकर मार दी थी गोली, राज सारे दफन हो गए

जबलपुर के गैंगस्टर विजय यादव के एनकाउंटर पर उठे थे सवाल, मजिस्ट्रियल जांच में मुठभेड़ को सही बताया  

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जबलपुर। कानपुर वाला गैंगस्टर विकास दुबे, जिंदा रहते जितना चर्चा में था, उससे ज्यादा एनकाउंटर में मारे जाने के बाद है। इसी तरह की आपराधिक कहानी तकरीबन 11 महीने पहले जबलपुर में सामने आई थी। यहां के गैंगस्टर विजय यादव और उसके साथी समीर खान के नरसिंहपुर में एनकाउंटर की मजिस्ट्रियल जांच पूरी हो गई। रिपोर्ट गृहविभाग को हाल ही में भेजी गई है। इसमें एनकाउंटर पर सवाल उठाने वालों के दावों को खारिज करते हुए पुलिस मुठभेड़ को सही बताया गया। हालांकि, सवाल उठाने वाले अब भी यही कह रहे हैं कि विजय यादव अपराध की दुनिया का खूंखार कुछ नेताओं और कई पुलिस अफसरों के संरक्षण और मिलीभगत से ही बना था। एनकाउंटर से इस मिलीभगत का राज अब राज ही रहेगा। आम से खास तक जानते हैं कि विजय यादव को कुछ नेताओं और पुलिस अफसरों ने ही पाला-पोसा था। उसके जरिए सम्पत्ति हड़पी थी। विजय यादव और उसके साथी समीर खान के सनसनीखेज एनकाउंटर को नरसिंहपुर में 19 अगस्त 2019 को एएसपी राजेश तिवारी, निरीक्षक प्रभात शुक्ला और उनकी टीम ने अंजाम दिया था। पुलिस के अनुसार विजय बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए जबलपुर जा रहा था। एनकाउंटर मामले की जांच एसडीएम महेश बमनहा ने की। उन्होंने बताया कि दो माह पहले जांच पूरी हो गई थी और रिपोर्ट कलेक्टर के माध्यम से गृह विभाग को भेजी गई। इस मामले में बयान और सबूत पेश करने के लिए विधिवत इश्तिहार जारी किए गए थे, लेकिन जहां एनकाउंटर हुआ था उस क्षेत्र से कोई भी ग्रामीण बयान देने नहीं आया। मृतक के परिजन ने बयान दर्ज कराए थे, लेकिन उन्होंने कोई सबूत नहीं दिया। समीर की पत्नी, मां और विजय के परिजन ने इसे फेक एनकाउंटर बताया था। परिजन का कहना था कि सबूत वे कोर्ट में पेश करेंगे।

इस मामले में बदमाशों के एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों और अफसरों के भी बयान दर्ज किए गए थे। जांच का निष्कर्ष पुलिस के दावे की पुष्टि के रूप में निकला। शहर में माना जाता था कि विजय यादव ने अपने खौफ के दम पर करोड़ों की प्रॉपर्टी पर लोगों को काबिज कराया। वहीं, कई लोगों को सिर्फ धमका कर बेचने पर मजबूर कर दिया था। विजय और उसके साथी समीर पर 15 हजार का इनाम था। दोनों चार जनवरी 2017 की रात 10 बजे पारिजात बिल्डिंग के सामने कुम्भारे हेल्थ क्लब के पास कांग्रेस नेता राजू मिश्रा और हिस्ट्रीशीटर कक्कू पंजाबी की हत्या के आरोपी थे। नरसिंहपुर पुलिस की मुठभेड़ में मारे जाने से विजय यादव के 15 साल के आपराधिक कृत्यों और उसकी मदद करने वाले/शह देने वालों के राज भी दफन हो गए।

विजय यादव व समीर का भले ही एनकाउंटर हो गया, लेकिन इस दोहरे हत्याकांड में आरोपी बने गोरखपुर निवासी विनय उर्फ बिन्नू विश्वकर्मा, नटबाबा की गली दीक्षितपुरा निवासी आदेश सोनी अब भी फरार हैं। दोनों की गिरफ्तारी पर 15-15 हजार का इनाम घोषित है। जबलपुर आईजी भगवत सिंह चौहान ने बताया कि नरसिंहपुर एनकाउंटर की मजिस्ट्रियल जांच पूरी हो गई है। इसकी रिपोर्ट गृहविभाग को भेजी जा चुकी है।