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शराब दुकानों की आवंटन प्रक्रिया पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जानें क्या कहा…

-शराब की दुकानों के आवंटन को हुए ठेके की वैधानिकता को दी गई थी हाईकोर्ट में चुनौती

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हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका (प्रतीकात्मक फोटो)

हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका (प्रतीकात्मक फोटो)

जबलपुर. जिले की शराब की दुकानों के आवंटन के लिए हुए ठेके की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि याचिका सरकार को क्षति पहुंचाने की मंशा से दायर की गई प्रतीत होती है।

बता दें कि शराब ठेकेदारों सिद्घार्थ पांडेय व विनोद पाठक ने यह याचिका दायर की थी। कहा था कि 23 जून को राज्य सरकार ने जबलपुर जिले की शराब दुकानों के आवंटन के लिए ठेकेदारों से ऑनलाइन निविदा आमंत्रित कीं। अधिवक्ता प्रवीण पांडेय ने दलील दी कि अपनी मर्जी की कंपनी को ठेका देने की मंशा से इसके दूसरे दिन ही 24 जून को निविदा खोलकर मेसर्स प्रभा स्टार कंपनी को ठेका दे दिया। इस आवंटन मे 25 फरवरी के गजट नोटिफिकेशन के प्रावधानों व निर्देशित प्रक्रिया का पालन नही किया गया। टेंडर की सूचना सभी इच्छुक ठेकेदारों तक पहुंचाने के लिए इसके आमंत्रण का नोटिस प्रकाशित नही कराया गया। इसके चलते सभी इच्छुक ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नही ले सके। इससे सरकार को राजस्व की हानि हुई। लिहाजा, उक्त टेंडर निरस्त कर नए सिरे से प्रक्रिया का पालन करते हुए टेंडर बुलाए जाएं।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार मित्तल व जस्टिस अंजुलि पालो की युगलपीठ ने पूछा कि याचिकाकर्ता कितनी राशि में ठेका लेना चाहता था? कितने में वर्तमान ठेकेदार को आवंटन हुआ और सरकार को कितना नुकसान हुआ? इस सवालों के जवाब याचिकाकर्ता के वकील नहीं दे सके। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका को फर्जी करार देकर निरस्त कर दिया। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्पेंद्र यादव उपस्थित हुए।