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mp के भाजपा विधायक गड़बड़ी में फंसे पर सरकार है मेहरबान

विधायक मोती कश्यप व हाईपावर कमेटी को हाईकोर्ट का नोटिस

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High Court notice to mla Moti Kashyap and the highpower committee

High Court notice to mla Moti Kashyap and the highpower committee

जबलपुर। जाति प्रमाणपत्र मामला भाजपा विधायक मोती कश्यप का पीछा नहीं छोड़ रहा है। मप्र हाईकोर्ट ने विधायक मोती कश्यप व जाति प्रमाणपत्र की जांच के लिए गठित की गई हाईपॉवर स्क्रूटिनी कमेटी को नोटिस जारी किए हैं। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की सिंगल बेंच ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए दोनो से चार हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है। मोती कश्यप कटनी जिले की बड़वारा सुरक्षित सीट से भाजपा के विधायक हैं।


यह है मामला
२००८ के विधानसभा चुनाव के बाद बड़वारा विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी नेता रामलाल कोल ने मप्र हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर कश्यप के निर्वाचन को चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि विधायक कश्यप मूलत: ढीमर जाति से हैं। यह जाति प्रदेश में अनुसुचित जनजाति के अंतर्गत नहीं आती। आरोप लगाया गया कि चुनाव लडऩे के लिए क श्यप ने मांझी जनजाति का फर्जी जाति प्रमाणपत्र पेश कर दिया। जबकि उनके शैक्षणिक दस्तावेजों में भी कश्यप की जाति ढीमर ही दर्शाई गई है। मामले में १० अप्रैल २०१३ को हाईकोर्ट ने कश्यप का निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया था। इसके खिलाफ कश्यप सुप्रीम कोर्ट गए। २०१४ के विधानसभा चुनाव के दौरान सुप्रीम कोर्ट से उन्हें मप्र हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन मिल गया। चुनाव जीत कर वे फिर विधायक बन गए। इसके खिलाफ कोल ने फिर याचिका दायर की, लेकिन इस बार हाईकोर्ट ने तकनीकी आधार पर उनकी याचिका को खारिज कर दिया। बुधवार को न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता कटनी बड़वारा निवासी रामलाल कोल की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम स्थगनादेश के कारण मोती कश्यप अब भी विधायक बने हुए हैं। उनकी एसएलपी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। नियमानुसार उच्च स्तरीय जांच कमेटी को 3 माह के भीतर फर्जी जाति प्रमाणपत्र की शिकायत पर अपनी रिपोर्ट पेश कर देनी चाहिए थी लेकिन 6 माह गुजरने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।


नहीं सुन रही समिति
याची की ओर से अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि विधायक कश्यप के उक्त जाति प्रमाणपत्र की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति को चार माह पूर्व भी उन्होंने आवेदन दिया था। याचिकाकर्ता पूर्व में हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी जिसपर सुनवाई पूरी होने के बाद विधायक कश्यप का निर्वाचन शून्य करार दे दिया गया था। बाद में विधायक कश्यप ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) के जरिए चुनौती दी थी जिसपर सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम स्थगनादेश के कारण मोती कश्यप अब भी विधायक बने हुए हैं। उनकी एसएलपी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसपर हाईकोर्ट ने विधायक मोती कश्यप व जाति प्रमाणपत्र की जांच के लिए गठित की गई हाईपॉवर स्क्रूटिनी कमेटी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किए हैं।

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