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जबलपुर। वे बैंक से अफसर पद से रिटायर हुए थे। बेटा विदेश में नौकरी करता है। जबलपुर शहर में पद-प्रतिष्ठा खूब थी। लेकिन, 67 वर्षीय आरके पांडे की अकेले संघर्ष करते हुए सांस थम गई। वे कोरोना से तो लड़े, लेकिन हड्डी में फ्रैक्चर और दर्द के बीच बढ़ती उम्र के कारण बीमारियों से हार गए। कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद से वे मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती थे। उठ-बैठ भी नहीं पा रहे थे। उनका कोरोना रिपीट टेस्ट किया गया था। डॉक्टर के अनुसार निगेटिव रिपोर्ट आने पर उन्हें आर्थोपेडिक विभाग में भर्ती कर फ्रैक्चर का इलाज होना था। लेकिन, नियति को कुछ और मंजूर था। इससे पहले कि रिपीट टेस्ट की रिपोर्ट आती, दुनिया छोड़कर चले गए। बाद में रिपोर्ट आई, तो कोरोना निगेटिव थी।
स्विट्जरलैंड में रह रहा बेटा, पिता को कंधा तक न देने पाने की बात से विचलित है। विशाखपट्टनम में रह रही बेटी का रो-रोकर बुरा हाल है। कोराना संक्रमण काल में घर पर क्वारंटीन वृद्ध की पत्नी को ढांढस बंधाने के लिए कोई साथ में नहीं है। जबलपुर के विजय नगर के जेडीए स्कीम-5 निवासी आरके पांडे 20 मार्च को बेंगलूरु से लौटे थे। करीब एक महीने बाद घर में स्लिप होकर गिरने से उनकी कूल्हे की हड्डी में फ्रेक्चर हो गया था। उपचार कराने गए तो डॉक्टर ने पहले कोरोना टेस्ट करने के लिए कहा। 26 अप्रैल को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उसके बाद से वे मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के कोविड वार्ड में भर्ती थे। उन्हें आइसीयू सेक्शन में भर्ती रखा गया था।
पुरानी बीमारियों से खतरा था
मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के अनुसार आरके पांडे, पैर में फ्रेक्चर, ओब्सट्रक्टिव यूरो पैथी, हाई ब्लड प्रेशर से पीडि़त थे। मूत्र मार्ग में रुकावट, संक्रमण, किडनियों में सूजन की समस्या हो गई थी। चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण उन्हें थ्रोम्बोसिस एवं एमबोलिज्म का खतरा था। उन्हें कोरोना के कारण फेफड़ों में निमोनिया की समस्या नहीं थी। वे भर्ती के समय से ही ऑक्सीजन सैच्युरेशन मेंटेन कर पा रहे थे। 3 मई को मूत्र मार्ग अवरुद्ध होने से पेशाब की थैली में मूत्र इक_ा होने के कारण पेट फूलने की समस्या हुई थी। रात में उन्हें सांस लेने में समस्या होने पर वेंटिलेटर पर रखा गया। लेकिन उनकी जीवन रक्षा नहीं हो सकी।
Published on:
05 May 2020 08:52 pm
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