
baby hostage for money
जबलपुर. शहर के रसल चौक स्थित आयुष्मान अस्पताल में एक महिला साढ़े 22 हजार रुपए का बिल जमा नहीं कर पाई। अस्पताल प्रबंधन ने उसके दो माह के बच्चे को अस्पताल में बंधक बना लिया। महिला को अस्पताल से बाहर कर दिया। महिला गिड़गिड़ाती रही लेकिन प्रबंधन पर कोई असर नहीं पड़ा। महिला शाम को ओमती थाने पहुंची। पुलिस ने 14 घंटे बाद मां को बच्चे से मिलवाया। पुलिस ने मामले को जांच में लिया है।
- आयुष्मान अस्पताल का कारनामा, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मां को मिला बच्चा
- साढ़े 22 हजार रुपए नहीं चुकाने पर दो माह के बच्चे को अस्पताल में 14 घंटे तक बंधक बनाया
15 सितम्बर को किया था भर्ती
शीतलामाई निवासी अनार सिंह रावत मजदूर है। उनके दो माह के बेटे का 15 सितम्बर को स्वास्थ्य खराब हुआ। वे उसे आयुष्मान अस्पताल ले गए। जहां प्रबंधन ने बच्चे को भर्ती किया। गुरुवार सुबह अस्पताल प्रबंधन ने शिवानी को 22 हजार 500 रुपए का बिल थमा दिया। शिवानी ने इतनी रकम न होने की बात कही, तो बच्चे को अस्पताल में रखकर शिवानी को अस्पताल से बाहर कर दिया। शिवानी अस्पताल के बाहर बैठी रही।
थाने में शिकायत
शिवानी शाम लगभग चार बजे ओमती थाने पहुंची। थाना प्रभारी वीरेन्द्र सिंह पवार को आपबीती बताई। जिसके बाद थाने से स्टाफ को अस्पताल भेजा गया। बच्चा अस्पताल में ही मिला। जिसके बाद पुलिस ने पहले तो प्रबंधन से बातचीत की और फिर बच्चे को उसकी मां के सुपुर्द किया।
महिला का बच्चा पांच दिन से भर्ती था। उसने एडवांस जमा नहीं किया। बच्चे के स्वस्थ होने के बाद भी महिला ने पैसे जमा नहीं किए। महिला द्वारा लगाया गया आरोप गलत है।
प्रतीक जैन, संचालक, आयुष्मान अस्पताल
शिवानी रावत ने शिकायत में बताया कि उससे साढ़े 22 हजार रुपए जमा कराने को कहा गया था। बच्चे को आयुष्मान अस्पताल में रखकर शिवानी को अस्पताल से बाहर कर दिया गया। पुलिस ने बच्चे को मां के सुपुर्द कराया। जांच की जा रही है।
वीरेन्द्र सिंह पवार, थाना प्रभारी
Published on:
22 Sept 2023 12:02 pm
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