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जबलपुर/नरसिंहपुर। जनसुनवाई में अपने गांव खुरपा की सड़क की समस्या को लेकर पहुंचे सीनियर सिटीजन पीके पुरोहित को बकवास करने के आरोप में कलेक्टर अभय वर्मा के आदेश पर जेल भेजने के मामले में मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने जबलपुर संभाग के राजस्व आयुक्त और पुलिस महानिरीक्षक को आदेश दिया कि वे तीन सप्ताह में मामले की जांच कर रिपोर्ट दें। आयोग के सदस्य मनोहर ममतानी ने घटना के समय के सीसीटीवी फुटेज भी सुरक्षित रखने के लिए कहा है। गौरतलब है कि इस मामले में पत्रिका ने सबसे पहले खबर प्रकाशित कर मामले को उजागर किया था।
जिलेभर में आक्रोश
समस्या को लेकर कलेक्टर के बर्ताव पर लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। मंगलवार को भी अलग-अलग संघठनों ने रैलियां निकालकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे और कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। जिला कांग्रेस कमेटी, सर्वब्राह्मण और सर्व समाज ने अन्य दोषी अफसरों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की मांग की। गाडरवारा में कांग्रेस नेत्री सुनीता पटेल के नेतृत्व में रैली निकाली गई। प्रदर्शन कर्ताओं का कहना था कि कलेक्टर आचरण उनके पद की गरिमा और मर्यादा के विपरीत है। जनता का दर्द समझने की बजाय उन्हें प्रताडि़त या हतोत्साहित करने वाले ऐसे अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए।
यह है मामला
ग्राम खुरपा निवासी 61 साल के पीके पुरोहित ने खुरपा बड़ा से चीलाचोन तक २ किलोमीटर के बदहाल रास्ते को दुरुस्त कराने के लिए सीएम हेल्पलाइन 181 में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके के लिए शिकायत एल वन अधिकारी लोक निर्माण विभाग की एसडीओ सीमा सगर के कार्यालय में भेजी गई। सगर ने पुरोहित को फोनकर कार्यालय बुलाया और कहा, वह 10 दिन में सड़क का निर्माण करा देंगी। करीब 15 दिन बाद सगर ने उन्हें फोन पर बताया कि मार्ग प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से बनाई जाएगी, इसलिए मामला सीएम ग्राम सड़क योजना के कार्यालय में भेजा गया है। वहां पुरोहित को बताया गया, यह रास्ता लोक निर्माण विभाग से बनाया जाएगा। सड़क नहीं बनने पर 21 अगस्त को पुरोहित कलेक्टर के पास जनसुनवाई में फरियाद लेकर पहुंचे। कलेक्टर ने उनका आवेदन लिया और लोक निर्माण विभाग के काउंटर पर भेज दिया। वहां कोई मौजूद नहीं होने पर वे कलेक्टर के पास वापस आए तो कलेक्टर ने उन पर बकवास करने का आरोप लगाते हुए भड़क गए। कलेक्टर ने पुलिस बुलाकर पुरोहित को कोतवाली थाने भिजवा दिया। जहां शाम 5 बजे तक उन्हें बैठाए रखा गया। बाद में उन्हें धारा-151 के तहत गिरफ्तार कर एसडीएम कोर्ट ले जाया। एसडीएम अपने कार्यालय में नहीं थे तो उन्होंने फोन पर ही अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को निर्देश देकर उसका वारंट तैयार कराया और जेल भेज दिया। इतना ही नहीं 4 दिन तक उनकी जमानत भी नहीं होने दी।
Published on:
28 Aug 2018 07:07 pm
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