
Maa Nunhai Maa Sunarhai jewellery
जबलपुर। माता रानी की आराधना का पर्व शारदेय नवरात्रि की धूम पूरे शहर में है। दो साल बाद माता के भक्तों का उत्साह एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। मठ मंदिरों से लेकर देवी पंडालों तक जमकर भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। वैसे तो हर प्रतिमा की अपनी एक आभा है, लेकिन नगर सेठानियों के नाम से विख्यात सुनरहाई, नुनहाई वाली माता की पहचान और उनका आकर्षण सबसे हटकर है। माता का वैभव जो एक बार देख लेता है वह हर बार उनके दर्शनों को खिंचा चला आता है। वे एक बार फिर करोड़ों रुपयों के हीरे-जवाहरात, सोना-चांदी के गहनों से शृंगार कर भक्तों को दर्शन दे रही हैं।
सेठानियों के पास 7 से 7.5 करोड़ के गहने
सुनरहाई, नुनहाई वाली माता ऐसे ही सेठानियां नहीं बनी हैं, बल्कि भक्तों लोगों ने मन्नतें पूरी होने पर दिल खोलकर माता को सोना चांदी हीरे मोती अर्पित किए। जिसके परिणाम स्वरूप आज दोनों माताओं के पास करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपए के गहने हैं जो हर साल बढ़ते जा रहे हैं। बुंदेलखंडी शैली में विराजमान होने वाली माता की स्वर्णिम आभूषणों की आभा देखते ही बनती है।
सुनरहाई की सेठानी की नथ बेंदी में जड़े 24 कैरेट के 100 हीरे
सुनरहाई की सेठानी इस साल अपना 158वां स्थापना दिवस मना रही हैं। उनके पास सबसे ज्यादा हीरे और सोना है। जानकारी के अनुसार माता के पास 100 हीरे 24 कैरेट, 1.5 से 2 किलो के करीब सोना, 175 किलो चांदी समेत करीब 3 से 3.5 करोड़ के गहने हैं। उनकी नथ बेंदी और हाथ की फूल घड़ी में हीरे लगे हैं जो माई के वैभव को दर्शाते हैं। समिति सचिव दिनेश राठौर ने बताया माता के सभी गहने सोना चांदी उनके भक्तों द्वारा अर्पित की गई है। अगले दो सालों में माता का सोने का रथ बनाने की तैयारी चल रही है। इसमें कुछ हिस्सा चांदी का भी रहेगा।
नुनहाई की सेठानी के पास 350 किलो चांदी का रथ
नुनहाई वाली माता की स्थापना को 153 वर्ष पूर्ण हो गए हैं। माता आज भी ठेठ बुंदेली अंदाज, श्वेतवर्ण रूप में विराजमान होती हैं। माता 50 से ज्यादा हीरे जडि़त नथ, बेंदी धारण करती हैं। इसके अलावा 1.5 से पौने दो किलो सोने के हार, कंगन, बाजूबंध, माणिक, मोती सहित करीब 3.5 करोड़ रुपए के गहनों का शृंगार कर भक्तों को दर्शन देती हैं। माता के सेवक विनीत सोनी ने बताया साल 2019 में स्थापना 150 वर्ष पूर्ण होने पर 350 किलो चांदी का रथ बनवाया गया है, जिस पर विराजमान होकर माता रानी भक्तों को दर्शन देने निकलेंगी।
इन गहनों से होता है शृंगार
नगर सेठानियों का शृंगार पारंपरिक आभूषणों से किया जाता है। गले में बिचोहरी, पांजणीं, मंगलसूत्र, झुमका, कनछड़ी, सीतारामी हार, रामी हार, हीरों से जडि़त नथ, बेंदी, गुलुबंध, मोतियों की माला। हाथों में गजरागेंदा, बंगरी, दोहरी, ककना, अंगूठी, फूल घड़ी, बाजुबंध, कमरबंध, लच्छा, पैरों में पायजेब, तोड़ल, बिजौरीदार, पैजना और पायल समेत सोने चांदी की चेन से मुकुट, शेर भी सुशोभित होता है।
Published on:
29 Sept 2022 11:31 am
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