राज्य शासन को अपना रुख स्पष्ट करने के निर्देश
जबलपुर। इस सत्र में कक्षा पांचवीं व आठवीं की बोर्ड परीक्षा कराने के राज्य सरकार के निर्देश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इस पर हाईकोर्ट की जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी की एकलपीठ ने राज्य शासन से अपना रुख स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 14 नवंबर वाले सप्ताह में होगी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीपक पंजवानी ने हाईकोर्ट में दलील दी कि आरटीई अधिनियम के नियम विधायिका ने बनाए हैं। राज्य शिक्षा केंद्र ने प्रशासकीय निर्देशों के जरिए वैधानिक नियमों का उल्लंघन करते हुए पांचवीं व आठवीं की परीक्षा बोर्ड के जरिये कराए जाने का आदेश पारित किया है। अकादमिक सत्र के बीच में इस तरह का मनमाना आदेश छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ की परिधि में आने के कारण चुनौती के योग्य है।
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यह है याचिका
अशासकीय विद्यालय परिवार, जबलपुर की ओर से दायर याचिका में बताया गया कि राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी अशासकीय विद्यालयों को सात से 16 नवंबर, 2022 के बीच अर्धवार्षिक परीक्षा आयोजित करने के भी निर्देश दिए हैं। इसके 20 प्रतिशत अंक मुख्य परीक्षा में जोड़े जाएंगे। राज्य शिक्षा केंद्र के आदेश के बाद पांचवीं व आठवीं के छात्र-छात्राओं को प्रथम, द्वितीय व तृतीय भाषा की पुस्तकें पुन: क्रय करनी पड़ेंगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि अब तक एससीइआरटी की ओर से निर्धारित पुस्तकों से नहीं, एनसीईआरटी की पुस्तकों से पढ़ाया जा रहा था। राज्य शिक्षा केंद्र ने परीक्षाएं एससीईआरटी के पाठ्यक्रम के आधार पर होने की व्यवस्था दी है।