निर्भीक बचपन अभियान: गल्र्स ने जाना, कैसे करें सुरक्षा

सुरक्षित रहना है तो निर्भीक बनो, एमडी बंगाली गल्र्स स्कूल में बच्चों ने जाने सुरक्षा के तरीके 

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Jan 10, 2017
nirbhik bachpan abhiyan
जबलपुर। बच्चों के साथ बच्चा बनना पड़ता है तब वे अपनी बात कहना शुरू करते हैं। कुछ एेसा ही हुआ पत्रिका निर्भीक बचपन अभियान के दौरान एमडी बंगाली गल्र्स स्कूल में। जब महिला थाना एसआई अरुणा वाहने बच्चों के साथ उसी अंदाज में बात करने लगीं। बच्चे केवल प्यार की भाषा ही समझते हैं। इसलिए उन्हें प्यार से ही समझाया गया कि प्यार भरा स्पर्श क्या है। कौन सा स्पर्श प्यार से और कौन सा स्पर्श गलत इरादे का रहता है।

बच्चों ने जब इन बातों को जाना-समझा तो न सिर्फ अपनी आपबीती बताई बल्कि आस-पास होने वाली घटनाओं का जिक्र भी किया। एसआई अरुणा ने जहां बच्चों की बातें सुनीं, उन्हें समझाया और उनके पास जरूरी नंबर्स नोट कराए। वहीं दूसरी ओर आश्वस्त भी किया कि किसी भी मुसीबत के समय वे हमेशा बच्चों की मदद करेंगी। गल्र्स ने अपने सवालों में आत्म रक्षा के गुर जानने के साथ-साथ बहादुरी के किस्से भी सुनाए कि किस तरह उन्होंने छेड़खानी करने वालों की पिटाई की।

जागें और जगाएं भी

छोटी उम्र के बच्चों को घर, पड़ोस, रास्ते में और यहां तक कि स्कूल-कोचिंग में छेड़खानी जैसी घटनाआें का सामना करना पड़ता है लेकिन वे डर और संकोच की वजह से कुछ बता नहीं पाते। निर्भीक बचपन अभियान के तहत बच्चों का यही डर खत्म करने की कोशिश जारी है। जिसके चलते अब बच्चों को यह भी सिखाया जा रहा है कि वे अपने घर के दूसरे बच्चों, भाई-बहनों और पड़ोस के दोस्तों को भी यही जानकारी दें।

अब समझाइश इन बातों की भी

* बॉडी पाट्र्स के गुड-बैड टच पहली प्राथमिकता से बताना।
* सायबर क्राइम के विविध पहलुओं से अवगत कराना।
* आत्म रक्षा के लिए जूड़ो-कराटे के कुछ खास मूव सीखें।
* मुसीबत में मदद लेने पुलिस हैल्पलाइन्स के नंबर्स याद रखें।
* किसी घटना को छिपाएं नहीं, अभिभावक, टीचर, पुलिस से बताएं।
Published on:
10 Jan 2017 10:57 pm
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