
#DharmAstha : Shani jayanti and Vat Savitri worship at Jyeshtha amavasya
जबलपुर। न्याय के देवता शनिदेव और अमावस्या का योग धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे शनि अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन शनिदेव का पूजन करने और साढ़ेसाती दूर करने के किए गए उपायों का फल शीघ्र प्राप्त होता है।
शनि अमावस्या पर शनिवार को शहर के विभिन्न शनि मंदिरों में भक्तों का तांता लगा, शनि दोष और साढ़े साती काटने के लिए लम्हेटाघाट के शनि कुंड में डुबकी लगाई। पुराणों में भी इस कुंड का उल्लेख मिलता है। इसी कुंड के पास गयाजी, सूर्य, चंद्र व अन्य नवग्रह कुंड भी मौजूद हैं, जो आस्था का केंद्र हैं।
ऐसी है मान्यता - स्थानीय निवासी मोनू दुबे ने बताया नर्मदा के दक्षिण तट पर शनि कुंड का पानी काला प्रतीत होता है, जो इसकी पहचान भी है। इसका उल्लेख नर्मदा पुराण व स्कंद पुराण में भी मिलता है। यहां शनिवार को बड़ी संख्या में शनि दोष व साढ़े साती से पीड़ित लोग डुबकी लगाने और शनिदेव का पूजन करने आते हैं। कुंड में विराजमान शनिदेव की प्रतिमा भी प्राचीन है। इस कुंड की खासियत है कि यहां शनि मंत्र का जाप करते हुए डुबकी लगाने वालों की परेशानियां दूर हो जाती हैं।
शनिधाम तिलवारा में आज लगेगा 56 भोग
साल की पहली शनिश्चरी मोनी अमावस्या पर श्री शनिधाम तिलवाराघाट स्थित प्राचीन शनिदेव मंदिर में विशेष पूजन, शनि अभिषेक व दिव्य आरती, वृंदावन से आए 56 भोग का अर्पण, संगीतमय सुंदरकांड एवं भंडारे का आयोजन किया गया है।सुबह से ही भक्तों का आना जाना लगा है। लोग शनि दोष और साढ़ेसाती से मुक्ति की प्रार्थना भी कर रहे हैं। अन्य शनि मंदिरों में भी पूजन दर्शन करने वाले लोग भी पहुँच रहे हैं।
Published on:
21 Jan 2023 04:26 pm
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