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best tourist place in mp india सरकार के झील महोत्सव पर वन विभाग की फेंसिंग, अधर में आयोजन

बरगी डैम में जबलपुर की सीमा पर दावा ठोंक रहा है मंडला का वन महकमा, डैम बने वर्षों बीते, लेकिन जमीन विवाद का नहीं हुआ निपटारा

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जबलपुर। शिवराज सिंह सरकार द्वारा प्रदेश के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने कई योजनाएं बनाई जा रहीह ैं। लेकिन उनके ही अपने विभागों में आपसी सामंजस्य न होने से ये आयोजन अधर में लटकते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला बरगी झील महोत्सव में सामने आया है। हनुवंतिया की तर्ज पर बरगी में होने वाले बरगी महोत्सव के आयोजन स्थल खमरिया में मंडला के वन महकमे ने अपनी जमीन बताते हुए फें सिंग कर दी है।
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२७ साल पहले बने डैम के डूब क्षेत्र में से कुछ जमीन उनकी होने का दावा किया जा रहा है। जबकि २१ दिसम्बर से १ जनवरी तक वृहद आयोजन के पहले इसी स्थल पर आवश्यक इंफ्र ास्ट्रक्चर तैयार किया जाना है। जिसके लिए फें सिंग हटाना अनिवार्य होगा और महोत्सव के लिए पर्यटकों ने ऑनलाइन बुकिं ग भी शुरू कर दी है। प्रशासन ने इस समस्या का हल निकालने सरकारी नक्शे में पड़ताल कराई तो पता लगा कि उक्त जमीन एनवीडीए की है।
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४२ साल बाद भी नहीं सुलझा जमीनी विवाद
बरगी डैम का निर्माण १९७४ में शुरू हुआ था। अब तक ४२ साल बीतने के बावजूद बरगी क्षेत्र में जमीन के विवाद नहीं सुलझे। उल्लेखनीय है कि बांध तीन जिलों जबलपुर, मंडला व सिवनी में है। निर्माण के दौरान ८४ गांव प्रभावित हुए थे। ८०८६० हेक्टेयर जमीन पर डैम बना है। एक लाख लोगों का पुनर्वास हुआ था, लेकिन अभी भी विस्थापितों की समस्याएं और जमीनी विवाद बरकरार हैं।
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क्या कहते हैं जिम्मेदार-
झील महोत्सव शासन का महत्वाकांक्षी आयोजन है। स्थल पर मंडला जिले की वन विभाग की टीम द्वारा फेंसिंग किए जाने का मामला सामने आया है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर समस्या का निराकरण करेंगे। जिससे कार्यक्रम स्थल पर आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो सके और समय पर आयोजन हो सके।
- महेशचंद्र चौधरी, कलेक्टर
खमरिया के प्रकरण पर फिलहाल किसी प्रशासन या वन विभाग की ओर से कोई पत्राचार नहीं किया गया है। आयोजन स्थल पर जो भी समस्या आ रही है उसका निराकरण कराएंगे।
- रेनू सिंह, सीसीएफ
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