जबलपुर

#KalsarpDoshPooja नर्मदा के इस घाट पर पूजन से दूर होता है कालसर्प दोष

#KalsarpDoshPooja नर्मदा के इस घाट पर पूजन से दूर होता है कालसर्प दोष

2 min read
May 26, 2023
Worshipping of Narmada

जबलपुर . तिलवाराघाट का दक्षिणी नर्मदा तट अपने आप में सिद्ध व दोष निवारण करने वाला माना जाता है। मान्यता है कि यहां विधि विधान से पूजन करने पर पितृदोष, कालसर्प दोष समेत अन्य समस्याओं का निवारण हो जाता है। इसे मार्कंडेय धाम के नाम से जाना जाता है। यहां दो दशक पहले से कालसर्प दोष पूजन हो रहा है। इसके लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों व कस्बों से लोग यहां पहुंचते हैं।

●अति प्राचीन वट वृक्ष है, जहां ऋषियों ने किए थे तप
●नाग पंचमी पर किए जाते हैं विशेष आयोजन

स्कंद पुराण में उल्लेख

मार्कंडेय धाम का उल्लेख स्कंद पुराण के रेवा खंड शूल भेद में मिलता है। ये तट पितरों, नाग, गंधर्व व यक्षों का निवास माना जाता है। पुराण के अनुसार महर्षि मार्कंडेय ने यहां तपस्या की थी। अति प्राचीन विशाल वट वृक्ष हजारों ऋषि मुनियों की तपोस्थली की गवाही दे रहा है। इसके नीचे शिवलिंग व वासुकी नागपास यंत्र स्थापित है।

मानी जाती है महर्षि मार्कंडेय की तपोस्थली
तिलवाराघाट के दक्षिणी तट पर पितृदोष समेत अन्य समस्याओं को लेकर पहुंचते हैं लोग

हर माह पंचमी तिथि पर होते हैं पूजन

नागपंचमी के अलावा हर माह की कृष्ण व शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर विशेष परिस्थितियों में यहां दोष निवारण पूजन आदि सम्पन्न होते हैं। वैदिक ब्राह्मणों द्वारा ये पूजन 4 से 8 घंटे तक विधि विधान से सम्पन्न कराए जाते हैं। धाम के विचित्र महाराज ने बताया कि यहां की खासियतों से सीताराम दास दद्दा महाराज ने अवगत कराया था।

तपस्वी ने की शुरुआत

25 वर्ष पहले परमहंस सीताराम दास दद्दा महाराज ने मार्कंडेय धाम के रहस्यों व शास्त्रों में उल्लेखित खूबियों से लोगों का परिचय कराया। उन्होंने नागपंचमी पर सामूहिक कालसर्प दोष पूजन की शुरुआत की। इसके बाद यह धाम आमजनों के बीच जमकर प्रचारित हुआ। इसके अलावा पितृदोष, नवग्रह शांति अन्य ग्रह बाधाओं के निवारण के लिए भी लोग नर्मदा के इस सिद्ध तट पर आते हैं।

Published on:
26 May 2023 04:00 pm
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