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मप्र के सरकारी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का कमाल, दूसरा सफल किडनी प्रत्यारोपण

सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में सफल प्रत्यारोपण: पत्नी ने किडनी देकर पति को दी नई जिंदगी    

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kidney transplant surgery

जबलपुर। मेडिकल में 41 वर्षीय व्यक्ति का एक साल से डायलिसिस चल रहा था। पति को नई जिंदगी देने के लिए उसकी 35 वर्षीय पत्नी ने अपनी एक किडनी देने का निर्णय किया। 13 मार्च को किडनी प्रत्यारोहण किया गया।

बीपी 250 तक रहता था, अनदेखी की और किडनी हो गई खराब
41 वर्षीय व्यक्ति को पिछले कुछ वर्षों से ब्लड प्रेशर की समस्या थी। बीपी बढऩे पर शुरुआत में कुछ शारीरिक समस्या महसूस हुई तो अनदेखा कर दिया। धीरे-धीरे बीपी 200 और 250 तक पहुंच गया। इसके बावजूद समय पर दवाइयां लेने में लापरवाही की। किडनी की जांच भी नहीं कराई। कुछ समय बाद सेहत ज्यादा बिगडऩे पर अस्पताल में भर्ती हुआ तो जांच में किडनी खराब मिली। तुरंत दवा और फिर डायलिसिस से बीपी को नियंत्रित करने की कोशिश की गई। अच्छी बात यह है कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अब मरीज का बीपी नियंत्रण में है।

नि:शुल्क सर्जरी और उपचार
सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मरीज का किडनी ट्रांसप्लांट आयुष्मान योजना के तहत नि:शुल्क हुआ। ऑपरेशन के लिए यूरो सर्जरी विभाग की दोनों ओटी को ऑर्गन रिट्रीवल एवं ट्रांसप्लांट के लिए तैयार किया गया। नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी एवं एनस्थीसिया विशेषज्ञों की टीम ने पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। निजी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट पर लगभग 5-10 लाख रुपए खर्च होते हैं।

छह महीने में दूसरा प्रत्यारोपण
सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस मिलने के बाद यहां छह महीने में दूसरे मरीज का सफल किडनी प्रत्यारोपण हुआ है।पिछले वर्ष सितंबर में कटनी निवासी एक युवक का जटिल किडनी प्रत्यारोपण किया गया था। उसे पिता ने किडनी दी थी। पिता-पुत्र दोनों स्वस्थ हैं।

युवा डॉक्टरों का कमाल
सफल किडनी प्रत्यारोपण के पीछे भी युवा उत्साही डॉक्टरों की टीम रही। यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. फणींद्र सोलंकी और नेफ्रोलॉजी के डॉ. नीरज जैन के साथ मिलकर विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मिलकर किडनी प्रत्यारोपण की सुविधाएं जुटाईं। डॉ. सोलंकी ने दूसरे शहर जाकर सर्जरी का अनुभव प्राप्त किया। इसके बाद सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में छह माह में दो सफल किडनी प्रत्यारोपण किया। इस टीम में डॉ. तुषार, डॉ. प्रशांत पटेल, डॉ. अविनाश ठाकुर, डॉ. अनुराग दुबे, डॉ. अर्पणा, डॉ. मीना, डॉ. विश्वनाथ, डॉ. कमल, डॉ. अनिवेश और ऋतिका भी शामिल थे।