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महात्मा गांधी आश्रम की जमीन का पट्टा नहीं होगा रद्द

हाईकोर्ट ने 17 साल बाद जिला अदालत भोपाल का आदेश किया निरस्त, कहा-भोपाल के पूर्व नवाब की थी जमीन, सरकार को नहीं है अधिकार

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Jabalpur High Court

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जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट ने कहा कि भोपाल के बाग निशात अफजा स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल आश्रम की जमीन का पट्टा रद्द करने का अधिकार सरकार को नहीं है। सत्रह साल बाद इस भूमि के विवाद का पटाक्षेप करते हुए जस्टिस संजय द्विवेदी की सिंगल बेंच ने कहा कि उक्त भूमि भोपाल के पूर्व नवाब के स्वामित्व की थी, जो उन्होंने अपीलकर्ता के पिता को पट्टे पर दी थी। कोर्ट ने भोपाल जिला अदालत व राज्य सरकार के आदेश निरस्त कर दिए।

यह है मामला
भोपाल निवासी प्रेमनारायण मालवीय ने भोपाल जिला अदालत के फैसले को 2002 में अपील के जरिए चुनौती दी। कहा गया कि उसके पिता पं. चतुर नारायण मालवीय व उनके उत्तराधिकारियों को भोपाल के पूर्व नवाब ने 24 मार्च 1949 में खसरा नम्बर 64,68,84/2, 84/1, 117/3,87/1, 87/2, 88 व 89 की 46.12 एकड़ जमीन का पट्टा दिया। नौ मई को इसकी रजिस्ट्री की गई। इस जमीन पर स्व. चतुर नारायण मालवीय ने महात्मा गांधी मेमोरियल आश्रम बनाया। इसके संचालन के लिए उन्होंने समाज सेवा मंडल की स्थापना की। इस जमीन पर उनका कब्जा बरकरार रहा।

30 नवम्बर 1985 को अपीलकर्ता के पिता चतुर नारायण मालवीय का देहांत हो गया। अचानक 28 फरवरी 1992 को सरकार ने उनका पट्टा निरस्त करने के लिए शोकॉज नोटिस जारी कर 21 अगस्त 1992 को पट्टा निरस्त कर दिया। इसे अपीलकर्ता ने सिविल कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन कोर्ट ने उनका सिविल सूट खारिज कर दिया। जिला न्यायाधीश ने अपील भी निरस्त कर दी। इस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई। तर्क दिया गया कि आश्रम की स्थापना के लिए ही सेवा मंडल को जमीन दी गई। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि पूर्व नवाब की उक्त जमीन का पट्टा सरकार ने नहीं दिया, लिहाजा उसे निरस्त करने का भी अधिकार नहीं है।

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