केंद्र, राज्य सरकार, केंद्रीय व राज्य निर्वाचन आयोग से मांगा जवाब
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका के जरिए आरोप लगाया गया कि प्रदेश और दूसरे राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में चुनाव प्रचार करने वाले नेता कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण तीव्र गति से फैलने के कारणों में यह वजह सबसे प्रमुख है। चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक व जस्टिस अतुल श्रीधरन की डिवीजन बैंच ने याचिका पर केन्द्र, राज्य सरकार, केन्द्रीय एवं राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किए। अगली सुनवाई 26 अप्रैल तक इस संबंध में जवाब मांगा।
जबलपुर के ब्यौहारबाग निवासी अधिवक्ता पीसी पालीवाल व नेपियर टाउन निवासी अधिवक्ता उमेश त्रिवेदी की ओर से याचिका दायर कर कहा गया कि देश भर में कोरोना संक्रमण बुरी तरह फैल रहा है। अंतिम संस्कार के लिए शवों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। पूरे देश में ऑक्सीजन, रेमडिसिविर और जीवन रक्षक दवाइयों की मारामारी है। इस समय मे मप्र के दमोह में उपचुनाव के साथ पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी में विधानसभा के चुनाव कराए जा रहे हैं। प्रारम्भिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने अनावेदकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष स्वयं रखा।
सीजीएचएस कार्डधारकों का इलाज नहीं तो अवमानना याचिका होगी दायर
हाईकोर्ट ने कोरोना इलाज के मामले मे सीजीएचएस लाभार्थियों को राहत दी है। सिटीजन वैलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चंद्रा ने कहा कि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह निर्देश दिया है कि कोई भी मान्यता प्राप्त हास्पिटल सीजीएचएस कार्ड को अमान्य न करे, यह सुनिश्चित किया जाए। अब सीजीएचएस कार्डधारकों का निजी अस्पतालों में इलाज नहीं किया गया तो सिटीजन वैलफेयर एसोसिएशन जबलपुर उच्च न्यायालय मे अवमानना याचिका दाखिल करेगा। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने अनेकों शिकायतें संबंधित अधिकारियों को की हैं।