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यहां तो लॉकडाउन ने गजब कर दिया! नर्मदा नदी वर्षों बाद चांदी जैसी चमक रहीं

तटों पर मानव दबाव घटने और कल कारखाने बंद होने से साफ हुआ नर्मदा का पानी

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Narmada Crocodile News

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जबलपुर। नर्मदा नदी का पानी जबलपुर शहर के साढ़े सत्रह लाख और आसपास के जिलों के लाखों लोगों के लिए जीवनधारा की तरह है। लॉकडाउन का असर गजब का हुआ है। जीवनभर का तजुर्बा रखने वाले बुजुर्गों की मानें तो पिछले 60 साल में नर्मदा जल इतना कं चन देखने को नहीं मिला। विशेषज्ञों के अनुसार लॉकडाउन के कारण ग्वारीघाट से लेकर तिलवाराघाट, लम्हेटाघाट, भेड़ाघाट समेत नर्मदा के सभी प्रमुख तटों में मानव दबाव कम होने के कारण जल की गुणवत्ता और बेहतर हुई है। भयंकर बाढ़ के हालात, कड़ाके की ठंड से लेकर हर सीजन में रेवा तटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। गर्मी के दिनों में तो सुकू न के पल बिताने सुबह से लेकर देर रात तक तटों पर लोगों का तांता लगा रहता है। ये पहला अवसर है जब लगातार 6 सप्ताह से लोग नर्मदा तटों से दूर हैं। भूजलविद् की ओर से जनवरी में नर्मदा तट खारी घाट से सैम्पल जुटाकर जो जांच की गई थी, उसकी रिपोर्ट के अनुसार ज्यादातर मानकों के अनुसार प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ था। लेकिन लॉकडाउन के दौरान बरगी, जमतरा, ललपुर, तिलवाराघाट, पंचवटी तट, सरस्वती घाट, झांसी घाट से सैंपल लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिकों ने जल की गुणवत्ता जांच की तो तस्वीर बिल्कुल बदली हुई है।

जांच रिपोर्ट जनवरी में (मिलीग्राम प्रति लीटर)
कं टेट, मानक, मौजूदगी
बीओडी (बायो ऑक्सीजन डिमांड),
1, 2.8
पीएच, 6.5 से 8.5,8.9
डीओ(डिजॉल्व ऑक्सीजन लेवल),6,8
टोटल कोलीफार्म, 50-100,990
टोटल हार्डनेस,250,1050

मौजूदा जांच रिपोर्ट (मिलीग्राम प्रति लीटर)
कं टेट, मानक, मौजूदगी
बीओडी (बायो ऑक्सीजन डिमांड),
1 से कम, 0.7 से 0.8,
पीएच, 6.5 से 8.5,8.12,
डीओ (डिजॉल्व ऑक्सीजन लेवल),6,7.12,
टोटल कोलीफार्म, 50-100,22,
टोटल हार्डनेस, 250,170,
ए श्रेणी का है नर्मदा जल

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मासिक रिपोर्ट से लेकर सालाना रिपोर्ट के अनुसार नर्मदा जल ए श्रेणी में है। पिछले 4 साल में नर्मदा के जल स्तर की गुणवत्ता की स्थिति सुधरी है। पीसीबी पहले नर्मदा तटों से सैंपल लेकर गुणवत्ता की जांच करता था। बाद में जारी इुई गाइड लाइन के अनुसार अब नदी के बीचोंबीच से सैंपल लेकर जांच की जाती है। इस क्षेत्र में तटों के मुकाबले प्रदूषण कम होता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक एसके खरे ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान नर्मदा में मानव दबाव कम होने से जल की गुणवत्ता और बेहतर हुई है। नर्मदा जल पिछले चार साल से ए श्रेणी में है, जिसे सबसे अच्छा माना जाता है।
भूजलविद् विनोद दुबे ने बताया कि जनवरी में नर्मदा तट खारी घाट से सेंपल लेकर जांच की थी उस दौरान जल प्रदूषण का स्तर तय मानकों के मुकाबले ज्यादा पाया गया था। लॉक डाउन के दौरान तटों में मानव दबाव कम होने से निश्चित तौर पर नदी में प्रदूषण का स्तर घटा है। सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. एचबी पालन ने कहा कि नर्मदा के जल में सकारात्मक प्रभाव हुआ है, जलीय जीवों को भी इसका लाभ मिलेगा, रेत का उत्खनन न होने का भी लाभ हुआ है।