जबलपुर। भगवान शिव ने भगवती के आग्रह पर अपने लिए सोने की लंका का निर्माण किया था । गृहप्रवेश से पूर्व पूजन के लिए उन्होने अपने असुर शिष्य व प्रकाण्ड विद्वान रावण को आमंत्रित किया था । दक्षिणा के समय रावण ने वह लंका ही दक्षिणा में मांग ली और भगवान शिव ने सहजता से लंका रावण को दान में दे दी तथा वापस कैलाश लौट आए । ऐसी सहजता के कारण ही वे भोलेनाथ कहलाते हैं । ऐसे भोले भंडारी की कृपा प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील होने के लिए सावन जा महीना सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। सावन के इस अवसर पर हम आपको बताने जा रहे हैं भगवान् शिव की पूजन विधि व् मन्त्र(
ज्यारां मन शुद्ध होय जावे,ज्यारां पाप परा जावे,ज्यारे सुख संपति आवे,ज्यारां दुख दारिद्रय जावे,ज्यारे घर लक्ष्मी आवे,भणत भोलानन्द स्वामी,रटत शिवानन्द स्वामी इच्छा फ़ल पावे॥ऊँ॥