
सुप्रीम कोर्ट
त्योहारों और अन्य इमरजेंसी में विमान किराए में मनमानी बढ़ोतरी पर विमानन कंपनियां अब सुप्रीम कोर्ट के रडार पर आ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान इस पर चिंता जताते हुए किराया बढ़ोतरी को शोषण करार दिया है और केंद्र सरकार व नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को नोटिस जारी किया है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ इस PIL पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मुफ्त चेक- इन बैगेज सीमा को 25 किलो से घटाकर 15 किलोग्राम किए जाने और किराए की डायनमिक प्राइसिंग को लेकर चुनौती दी गई है। साथ ही विमान किराए के निर्धारण और अतिरिक्त शुल्कों पर नियामक नियंत्रण किए जाने की मांग की गई है।
सुनवाई के दौरान कुंभ मेले और पहलगाम आतंकी घटना के समय हवाई किराए में की गई भारी बढ़ोत्तरी का हवाला भी दिया गया था। प्रयागराज और जोधपुर जैसे शहरों में किराया सामान्य से तीन गुना तक बढ़ गया। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि यह समस्या सिर्फ कुंभ तक सीमित नहीं है, बल्कि हर त्योहार के दौरान यही स्थिति देखने को मिलती है।
याचिका में कहा गया कि हवाई परिवहन एक आवश्यक सेवा है और आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम 1981 के तहत राज्य का दायित्व है कि ऐसी सेवाएं किफायती और गैर शोषणकारी बनी रहें। एयरलाइंस एक ही दिन में कई बार किराए बदल सकती है, बिना किसी पारदर्शी व्यवस्था या पूर्व अनुमोदन के।
Published on:
21 Jan 2026 01:31 am
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