
हुसैन दलवाई, कांग्रेस नेता (फोटो- IANS)
ECI: देश के पांच राज्यों में चुनाव होना है। शाम चार बजे चुनाव आयोग तारीख का ऐलान करेगा। इससे पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य हुसैन दलवाई ने भारतीय निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब केंद्र सरकार के प्रभाव में काम कर रहा है और उसकी स्वतंत्रता खत्म हो चुकी है।
IANS से बातचीत के दौरान हुसैन दलवाई ने कहा कि जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। वहां जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि असम में चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे। दलवाई ने कहा कि चुनाव आयोग अब केंद्र सरकार की कठपुतली बन गया है। उसकी अहमियत खत्म हो चुकी है। आप देखिए असम में चुनाव किस तरह होंगे। वहां चुनाव नहीं होंगे, बल्कि चुनाव की धांधली होगी।
हुसैन दलवाई ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के जरिए वोटरों को वोटर लिस्ट से निकाल दिया गया है। यह पूरी तरह संविधान के खिलाफ है। अब लोगों के दिमाग में यह बात बैठ गई है कि चुनाव आयोग एक कठपुतली बन गया है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सिर्फ असम ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की जाएगी। वे हर जगह चुनावों में गड़बड़ी करने की कोशिश करेंगे। यह बिल्कुल साफ है। पश्चिम बंगाल में तो उन्होंने इस दिशा में काम करना भी शुरू कर दिया है।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि जब सरकार कहती है 'खड़े हो जाओ,' तो आयोग खड़ा हो जाता है और जब कहती है 'बैठ जाओ,' तो बैठ जाता है। इस तरह चुनाव आयोग की अहमियत खत्म हो चुकी है। इस दौरान दलवाई ने कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के हालिया बयान पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है।
हुसैन दलवाई ने कहा कि वे हमारे पड़ोसी देश हैं और हमें उनसे बात करनी चाहिए। हमें बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका से भी बातचीत करनी चाहिए। कहीं न कहीं एक प्रकार का सहयोगी ढांचा या संघ बनाना भी जरूरी है। बातचीत के जरिए ही समस्याओं का समाधान निकल सकता है। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि किसी देश के खिलाफ सिर्फ इसलिए लगातार बोलना ठीक नहीं है क्योंकि वह मुस्लिम देश है।
इसके अलावा उन्होंने 'हिंदू' और 'सनातन धर्म' के मुद्दे पर भी टिप्पणी की। दलवाई ने कहा कि हर व्यक्ति 'हिंदू' शब्द से खुद को जोड़ने के लिए बाध्य नहीं है। जो लोग 'हिंदू-हिंदू' की बात करते हैं, वे अक्सर सनातन धर्म की बात करते हैं। सनातन धर्म में जातिगत भेदभाव की मान्यता रही है, इसलिए स्वाभाविक है कि कुछ लोग इसका विरोध करेंगे।
Updated on:
15 Mar 2026, 3:07 PM IST
Published on:
15 Mar 2026, 3:07 PM IST
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