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महालक्ष्मी व्रत 17 को, मध्याह्न व्यापनी अष्टमी तिथि पर होगी महालक्ष्मी की पूजा

महालक्ष्मी व्रत 17 को, मध्याह्न व्यापनी अष्टमी तिथि पर होगी महालक्ष्मी की पूजा  

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mahalaxmi vrat 2022, date, puja muhurat and puja vidhi in hindi

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जबलपुर। संतानों की दीर्घायु, धन धान्य की प्राप्ति की कामना का पर्व महालक्ष्मी का व्रत पूजन 17 सितम्बर को मनाया जाएगा। इस दिन सप्तमी व अष्टमी दो तिथियों का योग बन रहा है लेकिन महालक्ष्मी या गज लक्ष्मी का पूजन मध्याह्न व्यापनी होता है, इसलिए शनिवार को ही महालक्ष्मी माता का पूजन व्रत पारायण होगा।

ज्योतिषाचार्य सत्येन्द्र स्वरूप शास्त्री के अनुसार अश्विन माह की अष्टमी तिथि की शाम को महालक्ष्मी व्रत पूजन का विधान है। ऐसे में शनिवार को सप्तमी के साथ अष्टमी तिथि भी पड़ रही है,चूंकि अष्टमी तिथि दूसरे दिन दाेपहर तक ही रहेगी, इसलिए सप्तमी युक्त अष्टमी तिथि पर ही महालक्ष्मी माता का पूजन किया जाना चाहिए। शनिवार को दोपहर2 बजकर 45 मिनट तक सप्तमी तिथि रहेगी, तत्पश्चात अष्टमी तिथि का प्रवेश हो जाएगा। दूसरे दिन 18 सितम्बर को अष्टमी तिथि 2 बजकर 46 मिनट तक रहेगी। इसलिए इस दिन पूजन नहीं किया जा सकता। इसी वजह से मध्याह्न व्यापनी पूजा विधान होने के कारण महालक्ष्मी व्रत का पूजन व पारायण 17 सितम्बर को ही होगा। दूसरे रविवार को पुत्र जीविका का व्रत पूजन एवं अष्टमी तिथाि का श्राद्ध पर्व होगा। महालक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त उत्तम योग में शाम 4 बजे से 7 बजे तक एवं मध्यम योग में शाम 7 से रात 9 बजे तक। इन दो योगों में पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा।


16 अंक का विशेष महत्व
पंडित वासुदेव शास्त्री ने बताया लक्ष्मी पूजन में 16 अंक का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों में षोडष मात्रिकाओं का उल्लेख मिलता है, जिनका पूजन विधान बताया गया है। इसी तरह लक्ष्मी सूक्त में 16 सूक्तियां हैं, जिनका पूजन रक्षासूत्र में 16 गांठ बांधकर संतानों की आयु वृद्धि के लिए होता है। इस पूजन में 16 दीपक जलाने एवं 16 लोटा दूर्वा से स्नान करने का महत्व बताया गया है। इसी तरह 16 बार महालक्ष्मी मंत्र समेत श्री सूक्त जाप किया जाता है। इस पूजन का मुख्य उद्देश्य लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति व संतानों की दीर्घायु की कामना की जाती है।

एरावत पर माता को लगेगा पकवानों का भोग
महालक्ष्मी पूजन के दिन ऐरावत हाथी पर विराजमान होकर आने वाली माता महालक्ष्मी को पकवानों का भोग लगाया जाएगा। इसके साथ ही ऐरावत हाथी का बेसन, खोवा आदि से बने गहनों से श्रंगार कर उससे सुख समृद्धि की कामना की जाएगा। गुजिया, पापड़ी, सेव, खुरमा आदि माता को भोग में चढ़ाया जाएगा।