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1696 में दिया था प्रेमिका को गिफ्ट, ये है MP का बेस्ट रोमांटिक टूरिस्ट प्लेस

MP में एक से बढ़कर एक टूरिस्ट प्लेस हैं। यहां हर साल ही बड़ी संख्या में टूरिस्ट सैर के लिए आते हैं। इसी कड़ी में हम को ऐसे स्थान पर ले जा रहे हैं जिसे प्यार की निशानी के रूप में भी जाना जाता है। 
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Abha Sen

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Updated: 26 Sep 2016, 1:47 PM IST

mastani

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बुंदेलखंड नरेश महाराजा छत्रसाल की बेटी मस्तानी ने बाजीराव पेशवा के प्यार में अपना घर-बार सब छोड़ दिया था। छत्रसाल, बाजीराव द्वारा की गई मदद से खुश होकर बेटी मस्तानी, बाजीराव को उपहार में दे दी थी। बाजीराव ने मस्तानी को अपनी दूसरी पत्नी बनाया।

-15 किमी दूर छतरपुर जिले से मऊ साहनिया में आज भी मस्तानी महल है। जिसे 1696 में बाजीराव ने मस्तानी के लिए बनवाया था। मस्तानी को राजनीति, युद्धकला, तलवारबाजी और घर के कामों का पूरा प्रशिक्षण मिला हुआ था।

-मस्तानी ने बाजीराव की मृत्यु के बाद जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। कुछ लोगों का मानना है कि मस्तानी बाजीराव पेशवा की चिता में कूदकर सती हो गई थीं।

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-1740 में बाजीराव की मौत होना बताई जाती है।


-1700 में छत्रपति शिवाजी के पौत्र शाहूजी महाराज ने बाजीराव के पिता बालाजी विश्वनाथ की मौत के बाद उसे अपने राज्य का पेशवा यानी प्रधानमंत्री नियुक्तकिया।

-20 साल की उम्र में कमान संभालने वाले बाजीराव ने अपने शासन काल में 41 युद्ध लड़े और सभी में जीत हासिल की।

-1727-28 के दौरान महाराजा छत्रसाल के राज्य पर मोहम्मद खान ने हमला बोल दिया। इस पर छत्रसाल ने बाजीराव से मदद मांगी। बाजीराव ने छत्रसाल की मदद की और मोहम्मद खान को पराजित किया।

-हाल में संजय लीला भंसाली निर्देशित फिल्म बाजीराव-मस्तानी इसी पर आधारित होकर बनाई गई थी। हालांकि फिल्म में कुछ काल्पनिक चित्रण होना भी बताया जाता है।