
Masterplan stuck during election
जबलपुर. चुनावी मौसम में नीतिगत निर्णयों में देरी शहर को कस्बाई स्वरूप में धकेल रही है। मास्टर प्लान में पिछले कई महीनों से निर्णय नहीं होने के कारण शहर के चारों ओर अनियोजित विकास हो रहा है। शहर विकास योजना में मुख्य मार्गों और पुल-पुलियों के लिए निर्धारित भूमि पर आवास एवं कॉलोनियां विकसित कर रहे हैं। शहर का मास्टर प्लान 2021 को पूरा हो चुका है, लेकिन नए में अब भी सरकार भूमि का उपयोग तय नहीं कर सकी है।
अक्टूबर में लग सकती है आचार संहिता
इसी साल विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता अगले माह लागू हो जाएगी। ऐसे में अभी भी नया मास्टर प्लान चार महीने के लिए अटक जाएगा। टाउन प्लानर्स के अनुसार जबलपुर पहले भी विकास योजना में देरी का परिणाम भुगत रहा है। समय पर विकास योजना लागू नहीं होने से नगर की कई प्रस्तावित सड़कों के स्थान पर बस्तियां बस गई हैं।
चारों ओर विस्तार
शहर का विस्तार पहले विजय नगर, ग्वारीघाट, तिलवाराघाट, लम्हेटाघाट, तिलहरी की ओर ही रहा है लेकिन नगर की परिधि तिलहरी से लेकर मंगेली, मानेगांव, न्यू भेड़ाघाट छोर, भेड़ाघाट, पनागर के कुसनेर, डिफेंस लेंड से आगे का हिस्सा, अमझर, पाटन छोर पर नुनसर, झागरा, खैरी की ओर भी तेजी से हो रहा है।
ऐसे समझें
शहर के गौर तिराहा से बरगी मार्ग, तिलवाराघाट के पार, पाटन बायपास, कटंगी बायपास, पिपरिया समेत अन्य इलाकों में तेजी से बसाहट बस रही है। विशेषज्ञों के अनुसार नया मास्टर प्लान आने में देर होने से मौजूदा निवेश एरिया के बाहर की बसाहट को सडक़, बिजली, पानी, ड्रेनेज, उद्यान, स्कूल, अस्पताल जैसे बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जूझना होगा।
शहर की 9 प्रस्तावित सडक़ों के ज्यादातर क्षेत्र में बसाहट बस गई। इससे पुरानी सड़कों पर दबाव बढ़ा। यातायात व्यवस्था चौपट हो रही है। शहर का चारों ओर बेतरतीब विकास हो रहा है। नई कॉलोनियों के निर्माण में बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
- संजय वर्मा, स्ट्रक्चर इंजीनियर व टाउन प्लॉनर
मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने भोपाल स्तर पर प्रक्रिया जारी है। स्थानीय टीम भी इसे लेकर लगातार काम कर रही है।
- आरके सिंह, संयुक्त संचालक टीएंडसीपी
Published on:
27 Sept 2023 01:42 pm
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