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जबलपुर की मेडिकल यूनिवर्सिटी बनेगी हिन्दी में परीक्षा कराने वाली देश की पहली यूनिवर्सिटी

जबलपुर की मेडिकल यूनिवर्सिटी बनेगी हिन्दी में परीक्षा कराने वाली देश की पहली यूनिवर्सिटी

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student from Kyiv Medical University

medical student

जबलपुर. मेडिकल(डॉक्टरी) की हिन्दी में पढ़ाई कराने के लिए इस माध्यम की किताबें जारी कर मध्यप्रदेश ने इतिहास रच दिया है। अब जबलपुर की मेडिकल यूनिवर्सिटी देश की पहली यूनिवर्सिटी बनने जा रही है, जो हिन्दी माध्यम में मेडिकल की परीक्षा आयोजित करेगी। इसके लिए इसी सत्र से तैयारी की जा रही है। मेडिकल स्टूडेंट्स को हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा देने का विकल्प मिलेगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार मेडिकल से जुड़े पाठ्यक्रमएमबीबीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, योगा, नैचुरोपैथी, नर्सिंग की परीक्षा इसी सत्र से हिन्दी में शुरुआत होने वाली है। मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। मेडिकल यूनिवर्सिटी से संबद्ध मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा के अध्ययनरत स्टूडेंट सैद्धांतिक और प्रायोगिक परीक्षा हिन्दी में दे सकेंगे।

अभी तक उन सभी हिन्दी भाषी स्टूडेंट्स जो मेधावी तो हैं, लेकिन चिकित्सा शिक्षा का पाठ्यक्रम अंग्रेजी भाषा में होने के कारण उन्हें आगे की पढ़ाई करने में समस्या का सामना करना पड़ता था, उनके भी डॉक्टर बनने की राह खुलेगी। हालांकि वे मेडिकल स्टूडेंट जो अंग्रेजी भाषा में ज्यादा दक्ष हैं, उनके लिए दोनों ही विकल्प उपलब्ध रहेंगे। वे हिन्दी या अंग्रेजी जिस भी भाषा में चाहें प्रश्न पत्र में उत्तर लिख सकेंगे।

16 को हुआ था पुस्तकों का विमोचन
प्रदेश सरकार और चिकित्सा शिक्षा मंत्रालय, एमयू व कई मेडिकल कॉलेजों के प्रोफेसरों के सामूहिक प्रयास से 16 अक्टूबर को मेडिकल के प्रथम वर्ष की पुस्तकों के हिन्दी संस्करण का विमोचन किया जा चुका है। इसके साथ ही अब इसी सत्र में हिन्दी में मेडिकल की परीक्षा आयोजित करने की तैयारी भी कर ली गई है।

साढ़े पांच सौ कॉलेज संबद्ध

मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर से प्रदेश के साढ़े पांच सौ कॉलेज संबद्ध हैं। इनमें एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, नैचुरोपैथी, योग से लेकर नर्सिंग के कॉलेज भी शामिल हैं। इन कॉलेज में 60 हजार से ज्यादा स्टूडेंट अध्ययनरत हैं, जिनके लिए अब हिन्दी में भी प्रश्न पत्र का उत्तर लिखने का विकल्प उपलब्ध रहेगा।

चिकित्सा शिक्षा के स्टूडेंट इसी सत्र से सैद्धांतिक व प्रायोगिक परीक्षा हिन्दी में दे सकेंगे। सभी पैथी के स्टूडेंट के लिए ये विकल्प उपलब्ध रहेगा। जो अंग्रेजी में परीक्षा देना चाहेंगे, उनके लिए पूर्व की तरह प्रश्न पत्र तैयार होंगे।

डॉ अशोक खंडेलवाल, कुलपति, एमयू

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