
mobile ruined of kids life
वीरेंद्र रजक@जबलपुर. बच्चा रोता है तो क्या आप मोबाइल थमा देते हैं। ऐसा है तो सतर्क हो जाएं। बच्चों के सोचने-समझने की क्षमता पर ब्रेक लग रही है। वे रील्स से हिन्दी की बजाय जापानी व चीनी भाषा सीख रहे हैं। वे चीनी-जापानी शब्दों के मायने नहीं समझते। रील्स कंटेंट की शैली में संवाद की कोशिश कर रहे हैं। डॉक्टर कहते हैं, स्क्रीन टाइम ज्यादा होने से बच्चे ‘ऑटिज्म’ बीमारी के शिकार हो रहे हैं। भाषा प्रभावित होने से माता-पिता उनकी बात नहीं समझ पा रहे।
जबलपुर में कामकाजी दंपती ने डेढ़ साल बच्चे के लिए आया रख ली। वह रोता तो उसे मोबाइल दे देती। 6-7 घंटे वह मोबाइल देखता। बच्चा 4 साल का हो गया, पर हिन्दी नहीं बोल पा रहा। रील्स कंटेंट की तरह चीनी-जापानी भाषा शैली में संवाद कर रहा है। उसका इलाज मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हो रहा है।
ऑटिज्म पीड़ित कई बच्चे आ रहे
मनोचिकित्सक डॉ. ओपी रायचंदानी की मानें तो मोबाइल-टीवी पर स्क्रीन टाइम बढ़ने से 7 साल तक के बच्चों को ‘ऑटिज्म’ बीमारी हो रही है। उनमें भाषा का विकास नहीं हो पाता। वे स्क्रीन पर देखी भाषा के ही शब्द बोलने लगते हैं। ऐसे कई मामले आ रहे हैं।
Published on:
20 Feb 2024 11:23 am

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