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जबलपुर। प्रदेश में आपराधिक वारदातें तेजी से बढ़ी हैं। यह बात जिला अदालतों के आंकड़े कह रहे हैं। जिला अदालतों में इस वर्ष की शुरुआत से अगस्त के अंत तक डेढ़ लाख के करीब आपराधिक मामले दायर किए गए। सभी प्रकार के मुकदमों को मिला लिया जाए, तो यह संख्या इस वर्ष अगस्त के अंत तक दो लाख पहुंच चुकी है। इनमें एक लाख से अधिक आपराधिक मामले इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, रीवा व सागर जैसे नगरीय क्षेत्र की अदालतों में ही दायर हुए हैं।
news facts- जिला अदालतों में इस साल अब तक दायर मामलों की संख्या दो लाख के पार
आठ माह में अदालत की दहलीज तक पहुंचे डेढ़ लाख अपराध
राजधानी के बराबर-
एक जनवरी से 31 अगस्त 2018 तक प्रदेश की जिला अदालतों में लगभग डेढ़ लाख मामले दायर किए गए। सबसे अधिक अपराध इंदौर में दर्ज हुए। वहां 35,000 से अधिक आपराधिक मुकदमों के साथ कुल 45 हजार मुकदमे दायर हुए। भोपाल व जबलपुर इस मामले में लगभग बराबरी पर हैं। दोनों जगह इस अवधि में 20-20 हजार मुकदमे दायर हुए। लेकिन, आपराधिक मामलों में भोपाल 18 हजार मामलों के साथ प्रदेश में दूसरे नम्बर पर, जबलपुर 17 हजार मामलों के साथ तीसरे व ग्वालियर 12 हजार मामलों के साथ चौथे स्थान पर है।
सिविल मामलों में भी इंदौर अव्वल-
निचली अदालतों में दायर होने वाले जमीन-जायदाद, लेनदेन, वैवाहिक, मोटर दुर्घटना दावा आदि के सिविल प्रकृति के मामलों की संख्या में भी बेतहाशा बढ़त देखी जा रही है। अगस्त के अंत तक इस वर्ष लगभग पचास हजार सिविल मामले दायर किए गए हैं। इनमें भी इंदौर अव्वल है। यहां अगस्त के अंत तक छह हजार से अधिक सिविल मामले दायर किए गए।
पुलिस की नाकामी-
जिस अनुपात में आपराधिक मामलों की संख्या बढ़ी है, कमोबेश उसी अनुपात में इनके निराकरण की दर में भी वृद्धि हुई है। जनवरी से जुलाई तक की अवधि में करीब डेढ़ लाख मामलों का निराकरण भी किया गया। इसके बावजूद लम्बित मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। पुलिस की नाकामी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
इंदौर सबसे आगे, जबलपुर का तीसरा नम्बर, एक जनवरी से 31 जुलाई 2017 तक की स्थिति प्रमुख शहर आपराधिक मामले
इंदौर 35000
भोपाल 18000
जबलपुर 17000
ग्वालियर 12000
उज्जैन 6000
सागर 6500
रीवा 7000
बढ़ते अपराध की प्रमुख वजह पुलिस, प्रशासन की असफलता के साथ शिक्षा व जागरुकता का अभाव भी है। विवाद अपराध तक पहुंचने के पहले ही समझाइश देने के लिए पर्याप्त जतन नहीं किए जा रहे हैं।
- संजय वर्मा, अधिवक्ता मप्र हाईकोर्ट
Published on:
17 Sept 2018 02:39 pm
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