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जबलपुर. सरकारी संस्थानों में रोजगार की आस में हर साल चार से पांच हजार युवा जिला रोजगार कार्यालय में पंजीयन कराते हैं। लेकिन, पंजीयन के अनुपात में भर्ती नहीं होने से पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है। वर्तमान में जिले में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 75 हजार है। युवाओं को निजी क्षेत्र में ही रोजगार मिल रहा है। इससे बेरोजगारी बढ़ रही है।
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हालात... सरकारी संस्थानों में रोजगार के अवसर कम
जिले में 75 हजार पंजीकृत बेरोजगार, लेकिन नाममात्र को ही मिल रहा काम
जानकारी के अनुसार रोजगार कार्यालय में हर साल चार से पांच हजार युवा पंजीयन करवाते हैं। इसके विपरीत 2 हजार को ही रोजगार मिल पाता है। इसमें 98 प्रतिशत नौकरियां निजी क्षेत्र की कम्पनियां दे रही हैं। शहर में 18 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों में हर साल लगभग 20 हजार छात्र प्रवेश लेते हैं। इनमें से करीब 12 हजार पासआउट होते हैं। शासकीय और निजी आईटीआई में भी हर साल पांच हजार छात्र एडमिशन लेते हैं। यूनिवर्सिटी और कॉलेज छात्रों की संख्या मिला दी जाए तो आंकड़ा और बढ़ जाएगा। इनमें से ज्यादातर युवा रोजगार कार्यालय में पंजीयन नहीं कराते। इसलिए यह संख्या 75 हजार तक सीमित है। जबकि वास्तव में यह संख्या सवा लाख से अधिक है।
रोजगार के क्षेत्र
आयुध निर्माणियां : दो साल से नियमित रूप से नहीं हो रही भर्ती।
स्वरोजगार : स्वरोजगार योजनाओं से हर साल 2-3 हजार को मिल रहा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार।
टेलीकॉम : शहर में टेलीकॉम की दो निर्माणियां हैं। इनमें लम्बे समय से सीधी भर्ती नहीं हुई।
रेलवे जोन : पश्चिम मध्य रेलवे रोजगार का बड़ा माध्यम है। यहां नियमित भर्तियां कम निकलती हैं।
सेना : तीन सैन्य प्रशिक्षण केंद्र हैं। हर साल 500 से एक हजार युवाओं को रोजगार मिलता है।
निजी इकाइयां : अधारताल-रिछाई में निजी इकाइयों में हर साल 1500 युवाओं को मिल रहा रोजगार।
पंजीकृत बेरोजगारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। निजी इकाइयों के सहयोग से जॉब फेयर आयोजित किए जाते हैं। हर साल 2 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया जा रहा है।
- एमएस मरकाम, डिप्टी डायरेक्टर, रोजगार कार्यालय
Published on:
23 Jul 2018 10:53 am
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