
जबलपुर. मध्य प्रदेश में अतिथि विद्वानों को हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत दी है। हाई कोर्ट ने सराकर के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। प्रदेश सरकार के फैसले के बाद कॉलेज स्कूलों में सेवाए दे रहे अतिथि विद्वानों की रोजी रोटी पर संकट आ गया है।
सरकार के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचे अतिथि विद्वानों को कोर्ट ने अंतरिम राहत दी है। हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है। उच्च न्यायालय ने अतिथि विद्वानों को हटाने पर रोक लगाते हुए कहा कि नई चयन प्रक्रिया जारी रहने तक कोई फैसला न हो। मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ और न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की युगलपीठ में चल रही है।
हाईकोर्ट की युगल पीठ ने तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव, तकनीकी शिक्षा संचालनालय के आयुक्त, शासकीय इंजीनियरिंग कालेज उज्जैन, पालिटेक्निक कालेज उज्जैन और एआइसीटीई को नोटिस जारी किया है। अब इस मामले की सुनवाई 26 अप्रैल को होगी। हाई कोर्ट में रेखा सिंह, पायल परमार, रूपेश रैकवार सहित उज्जैन के इंजीनियरिंग और पालिटेक्निक कालेज में पदस्थ 21 गेस्ट फैकल्टीज की ओर से याचिका लगाई गई है।
अधिवक्ता प्रशांत चौरसिया और संतोष आनंद ने कोर्ट से कहा कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 27 जनवरी, 2022 को जारी सर्कुलर में आगामी सत्र 2022-23 से अतिथि विद्वानों की नियुक्ति केवल 11 महीने के लिए होगी। जबकि याचिकाकर्ता अतिथि विद्वान कई सालों से इन कॉलेजो में पढ़ा रहे हैं। ये दोनों कॉलेज राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल से संबद्ध है।
इसी सर्कुलर के आधार पर वर्तमान में पदस्थ अतिथि विद्वानों को हटाया जा रहा है। वही कोर्ट में तर्क दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक जब तक नई चयन प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती है, तब तक फैकल्टीज को हटाया नहीं जा सकता। वही जो विद्वान अबी कार्य़रत हैं उनको नियुक्ति प्रक्रिया में प्राथमिकता देना चाहिए। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं की दलील सुनने के बाद इस मामले में अंतरिम रोक लगा दी गई। जिससे इन अतिथि विद्वानों को अंतरिम राहत मिल गई है।
Published on:
22 Apr 2022 03:20 pm
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