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यहां चंदा जुटाकर होता है सरकारी आयोजन, सरकार का ये मंत्रालय हर साल दिखाता है ठेंगा

यहां चंदा जुटाकर होता है सरकारी आयोजन, सरकार का ये मंत्रालय हर साल दिखाता है ठेंगा  

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जबलपुर. अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल भेड़ाघाट में 12 व 13 अक्टूबर को होने वाले नर्मदा महोत्सव के आयोजन के लिए चंदा जुटाना पड़ रहा है। दमोह के हटा महोत्सव, मैहर उत्सव व खजुराहो महोत्सव के लिए खूब झोली खोलने वाले संस्कृ ति विभाग ने एक बार फिर जबलपुर की उपेक्षा की है। जबकि, नर्मदा महोत्सव विभाग के कैलेंडर में शामिल है। वर्षों से मांग उठ रही है कि धुंआधार के समीप साल में एक बार होने वाले आयोजन के लिए संस्कृति विभाग को प्रदेश के अन्य महोत्सवों की तरह फं ड निर्धारित करना चाहिए। इस पर ध्यान नहीं दिया गया।

चंदा जुटाकर किया जा रहा नर्मदा महोत्सव का आयोजन, संस्कृति विभाग ने नहीं दिया फं ड, जबलपुर की एक बार फिर उपेक्षा

केवल एक दिन का भुगतान-
पंद्रह साल से भेड़ाघाट में नर्मदा महोत्सव हो रहा है। तीन तक चलने वाला महोत्सव फं ड की कमी के कारण दो दिन में सिमट कर रह गया। संस्कृति विभाग पिछले साल तक आयोजन में दोनों दिन आने वाले कलाकारों को राशि का भुगतान स्वयं करता था। इस बार विभाग की ओर से केवल एक दिन कलाकारों को भुगतान किया जाएगा।


जुटाया जा रहा चंदा-
पर्यटन विकास निगम हर साल राशि देकर आयोजन में सहभागिता करता है। एमपीटी ने इस बार दस लाख रुपए की राशि दी है। इसके अलावा आयोजन स्थल पर सजावट, साउंड सिस्टम, टेंट, आतिशबाजी से लेकर अन्य व्यवस्थाएं जिला प्रशासन को करना होती हैं। इसके लिए भेड़ाघाट नगर परिषद् व प्रशासन के अन्य विभागों से राशि जुटाना पड़ती है। कार्यक्रम में आने आने वाले कलाकारों के ठहरने से लेकर अन्य व्यवस्थाओं का जिम्मा नगर निगम उठाता है।
फं ड निर्धारित करने की कही थी बात-

पिछले साल नगर प्रवास के दौरान संस्कृति विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव ने नर्मदा महोत्सव के लिए फं ड निर्धारित करने की बात कही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

आयोजन में एक दिन के कलाकारों का भुगतान संस्कृति विभाग की ओर से किया जा रहा है। कुछ राशि पर्यटन विकास निगम द्वारा उपलब्ध कराई गई है। नर्मदा महोत्सव के लिए फं ड निर्धारित हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने संस्कृति विभाग को पत्राचार किया है।
-हेमंत सिंह, सीईओ, जेटीपीसी

हटा महोत्सव, मैहर उत्सव व खजुराहो महोत्सव की तर्ज पर नर्मदा महोत्सव के लिए भी फं ड निर्धारित होना चाहिए। जिससे कि आयोजन को और भव्य स्वरूप दिया जा सके । चंदा के माध्यम से होने वाले आयोजन के लिए समय पर कलाकार निर्धारित नहीं हो पाते। इससे ठीक ढंग से कार्यक्रम का प्रमोशन भी नहीं हो पाता है।

-अनिल तिवारी, पूर्व सदस्य, एमपीटी