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संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने पर जोर दें: जस्टिस द्विवेदी

नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज में गीता जयंती के द्वितीय सोपान

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नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज में गीता जयंती के द्वितीय सोपान

नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज में गीता जयंती के द्वितीय सोपान

जबलपुर। संस्कृत भाषा विलुप्त होती जा रही है। आज संस्कृत भाषा ऐसी हो गई है कि जैसे किसी गांव में कोई व्यक्ति अंग्रेजी बोलता है और गांव के लोग उसका चेहरा देखते रहते हैं। उसी प्रकार से आज जब कोई संस्कृत बोलता है तो हम उसका चेहरा गौर से देखते हैं। जबकि हमारी संस्कृत भाषा कम्प्यूटर लेग्वेज के बहुत उपयोगी साबित हुई है और संस्कृत को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है। ऐसी संस्कृत भाषा को हम जन-जन की भाषा बनाएं और संस्कृत भारती जिस प्रकार से संस्कृत भाषा को लेकर कार्य कर रही है। वह अत्यंत प्रसंशनीय है। उक्त उद्गार नरसिंह मंदिर शास्त्री ब्रिज में गीता जयंती के द्वितीय सोपान के अवसर पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के जस्टिस संजय द्विवेदी ने व्यक्त किए। इस अवसर पर नरसिंहपीठाधीश्वर डॉ. स्वामी नरसिंहदास महाराज ने कहा कि श्रीमद् भगवत गीता सार्वभौमिक है, इसका ज्ञान शास्वत है। इस अवसर पर प्रमुख रूप से संस्कृत भारती के संगठन मंत्री मनोज पांडे, विजय तिवारी, राममूर्ति मिश्रा, अजय शुक्ला, लोकनाथ संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नर्मदा प्रसाद शर्मा, आचार्य अरुणेश कृष्ण शास्त्री, लालमणि मिश्रा सहित संस्कृत भारती के पदाधिकारी व गीताधाम-नरसिंह मंदिर के वेदाचार्य उपस्थित थे। जस्टिस द्विवेदी ने गीता श्लोक का पठन करने वाले छात्रों को सम्मानित भी किया।

‘जैसे किसी संत का जन्म होता है वैसे ही गीता की उत्पत्ति हुई’
आर्ट ऑफ लिविंग के संस्कारधानी निवासी कई सदस्यों ने गीता जयंती पर लखनऊ में हुए आयोजन में भाग लिया। संस्था के प्रशिक्षक अनुज श्रीवास्तव ने बताया कि आयोजन में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकरजी ने गीता की उत्पत्ति के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि जैसे किसी संत का जन्म होता है वैसे ही गीता की उत्पत्ति हुई। गीता भगवान की वाणी है, जिसका जन्म यद्ध भूमि में किसी खास परिस्थितियों में हुआ है, जो बार बार नहीं होता। गीता जयंती पर सभी प्रण लें कि गीता के उपदेशों को आत्मसात करने प्रयत्न करेंगे।

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