
avoid cigarette
जबलपुर. यंगस्टर्स को धूम्रपान करना स्टेटस सिम्बल की तरह लगता है, जैसे बाइक चलाते हुए सिगरेट के कश लगाना और माउथ फ्रैशनर का हवाला देकर गुटखा और पान मसाला खाना। सच तो यह कि इस तरह के नशे का प्रकार चाहे जो भी हो, लेकिन सिटी यंगस्टर्स बड़ी संख्या में टबैको सेवन के करीब होते जा रहे हैं। आइए जानते हैं कि किस तरह से विभिन्न एज ग्रुपों में यह आदत बनता जा रहा है।
ऐसे बदले आदत
- काउसंलिंग सेंटर्स में सेशन लेकर
- धीरे-धीरे करें छोड़ते का प्रयास
- चुइंगम का इस्तेमाल करे
- मेडिकल चुंइगम
- मेडिटेशन करके
Fact : तम्बाकू, सिगरेट छोड़ने के घरेलू उपाय, चुटकियों में छूट जाएगी नशे की लत
लगातार बढ़ रहे हैं मरीज
शहर में सिगरेट, गुटखा, खैनी, पान मसाला और विभिन्न माध्यमों से टबैको का सेवन करने के कारण लगातार कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। सिर्फ कैंसर ही नहीं, बल्कि इसके कारण यंग एज में ही लोगों को हार्ट अटैक, हाइ बीपी, अल्सर जैसी बीमारियां हो रही हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि पिछले 5 सालों में ही शहर में टबैको सेवन के कारण होने वाली बीमारियों में मरीजों की संख्या बढ़ चुकी है।
कॉलेज स्टूडेंट्स सबसे ज्यादा
युवाओं में सबसे ज्यादा विभिन्न माध्यमों से तम्बाकू का सेवन किया जा रहा है। पहले इलाज के लिए जहां सिर्फ ग्रामीण और शहर के कुछेक लोग आया करते थे, वहीं अब शहर में रहने वाले युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। इसमें टीनेजर्स और यंगस्टर्स की संख्या अधिक है। लोगों की देखा-सीखी में वे इस अंजाम तक पहुंचे रहे हैं।
नशामुक्ति केंद्र में कई केस
शहर के नशामुक्ति केन्द्र में भी कई केस सालाना बढ़ते जा रहे हैं, जिसमें सबसे ज्यादा युवाओं को उनके घरवाले तम्बाकू की लत छुड़वाने के लिए भर्ती करवाते हैं। इनमें उन्हें योग, मेडिटेशन और विभिन्न माध्यमों के जरिए सामान्य जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जाता है।
Published on:
26 Sept 2019 11:11 am
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