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संस्कृत की उपेक्षा: दड़बे में चल रहा कॉलेज, एक प्राध्यापक के भरोसे शास्त्री-आचार्य

संस्कृत की उपेक्षा: दड़बे में चल रहा कॉलेज, एक प्राध्यापक के भरोसे शास्त्री-आचार्य  

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Neglect of Sanskrit

जबलपुर . संस्कृत के विद्वान तराशने वाला लोकनाथ शास्त्री महाविद्यालय अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। महाकोशल के इकलौते संस्कृत महाविद्यालय का पुराना भवन जर्जर हो गया था। उसे ढहा दिया गया। नए भवन का निर्माण शुरू हुए पांच साल बीत गए, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। नतीजतन समीप के स्कूल भवन में किसी प्रकार महाविद्यालय संचालित हो रहा है। नगर निगम के इस महाविद्यालय की दुर्दशा का मुद्दा सदन में भी गूंज चुका है, इसके बावजूद तस्वीर नहीं बदल रही है।

#Devbhasha ka apman पांच साल से बन रहा महाविद्यालय भवन, कब तक बनकर पूरा होगा पता नहीं

बंद करने की थी तैयारी
सात साल पहले निगम के इस महाविद्यालय को बंद कर उसके स्थान पर मल्टी स्टोरी कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स के निर्माण की तैयारी ली गई थी। पत्रिका ने संस्कृत महाविद्यालय को बचाने के लिए मुहिम चलाई थी। इसके बाद निगम प्रशासन को अपना निर्णय बदलना पड़ा और महाविद्यालय को बंद होने से बचाया जा सका।

समृद्ध इतिहास
लोकनाथ शास्त्री महाविद्यालय का समृद्ध इतिहास रहा है। यहां से रास बिहारी द्विवेदी (राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता), साहित्य अकादमी विवेचक त्रिभुवनाथ शुक्ल जैसे विद्वान पढ़कर निकले हैं। यहां से संस्कृत की पढ़ाई करने वाले छात्र आगे चलकर वेदपाठी ब्राह्मण बनते हैं।

डेढ़ सौ छात्र, एक शिक्षक
संस्कृत महाविद्यालय में डेढ़ सौ छात्र संस्कृत से शास्त्री (ग्रेजुएशन), आचार्य (पोस्ट ग्रेजुएशन) की पढ़ाई कर रहे हैं। इन छात्रों को पढ़ाने के लिए केवल एक नियमित शिक्षक यहां पदस्थ हैं। यहां के नियमित शिक्षक एक-एक कर सेवानिवृत्त होते गए। उनके स्थान पर नई नियुक्ति नहीं की गईं। महाविद्यालय में 7 अतिथि विद्वानों के पद स्वीकृत हैं। इस बार अभी तक एक भी अतिथि विद्वान की नियुक्ति नहीं हुई है। निगम प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि निगम के स्कूलों में पदस्थ शिक्षक यहां छात्रों को अध्यापन करा रहे हैं।

● 2017 में शुरू हुआ था भवन का निर्माण
● 1.35 करोड़ निर्माण लागत
● 150 छात्र कॉलेज में अध्ययनरत
● 1 नियमित शिक्षक हैं
● 7 पद अतिथि विद्वान के स्वीकृत, एक भी नहीं भरा गया।

संस्कृत महाविद्यालय के भवन का निर्माण 2017 में शुरू हुआ था। कोरोना काल में कुछ समय काम बंद था। फिर ठेकेदार ने काम नहीं किया। अध्यापन के लिए अतिथि विद्वानों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है। जल्द नियुक्ति की जा सकती है।
- वीणा वर्गीस, शिक्षा अधिकारी, नगर निगम