
mental health
जबलपुर। मध्यप्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड नहीं है। इस पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। इससे सम्बंधित याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने सरकार को अंतिम अवसर देते हुए स्टेट्स रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।
- शासन को स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने दिया अंतिम अवसर
दरअसल, डुमना में एक विक्षिप्त महिला के पाए जाने के बाद उसके उपचार के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ी। तब सामने आया कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है। लिहाजा महिला को उपचार के लिए ग्वालियर भेजना पड़ा था। इस पर मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी की ओर से वर्ष 2020 में यह मामला दायर किया गया था। जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रपति की मंजूरी से सात अप्रैल, 2017 को प्रत्येक राज्य में स्टेट मेंटल हैल्थ अथारिटी का गठन नौ माह में किया जाना था। लेकिन मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ऐसा नहीं किया गया है। सुनवाई के समय सरकार के ओर से बताया गया था कि स्टेट मेंटल हैल्थ अथारिटी के गठन व उसके नियम के संबंध में सरकार द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। बताया गया कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने वित्त विभाग ने बजट स्वीकृत कर दिया गया है।
प्रशिक्षण में बाधा
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि निर्देशानुसार मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड का गठन किया जाना था। पुलिस सहित अन्य संबंधित विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाना था। जिसका पालन अभी तक नहीं किया गया है, जिससे बाधा आ रही है। युगलपीठ ने अन्य प्रावधानों का परिपालन करने निर्देश जारी किए थे। मामले में सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि अनेक अवसर देने के बाद भी मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। संबंधित विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। युगलपीठ ने राज्य सरकार को कार्रवाई के लिए अंतिम अवसर देते हुए स्टेटस रिपोर्ट पेश करने निर्देश दिए हैं।
Published on:
26 Jul 2023 10:48 am
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