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 नहीं मिली मोदी सरकार की राहत, किसानों को नहीं मिले पुराने नोट पर खाद-बीज

सेल्समेन बोले नहीं मिले निर्देश, समितियों के चक्कर काटते रहे किसान

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neeraj mishra

Nov 22, 2016

farmer

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सिहोरा। नोट बंदी के बाद किसानों को राहत के दावे उस वक्त फेल हो गए जब किसनों को पुराने नोट ले जाने पर खाद-बीज नहीं मिला। दरसल मोदी सरकार ने किसानों को राहत देते हुए पांच सौ और हजार के पुराने नोट से खाद-बीज खरीदने की छूट दी थी। जिसके चलते भारी संख्या में किसान सोसायटी पहुंच गए। लेकिन सेल्समेनों का कहना है कि ऐसा कोई आदेश अभी तक उनके पास नहीं आया है। जिसके चलते किसानों को सोसायटी से बैरंग लौटना पड़ा।

टीवी पर मोदी सरकार का ऐलान सुनकर मंगलवार को किसान समितियों में खाद-बीज लेने पुराने नोट लेकर पहुंचे, लेकिन सेल्समैन ने पांच सौ के नोट लेने से मना कर दिया। उसका कहना था कि उन्हें पुराने नोट लेने संबंधी किसी भी प्रकार के निर्देश उच्च अधिकारियों ने नहीं प्राप्त हुए हैं। जिससे सिहोरा और मझौली तहसील की दो दर्जन सोसायटियों में किसान दिन भर भटकते रहे।

परेशान हो रहे किसान

नोटबंदी के चलते सबसे ज्यादा किसान परेशान है। रबी सीजन की फसल के लिए किसानों को खाद और बीज खरीदना है। लेकिन उनके पास पुराने नोट हैं। वहीं विपणन संघ ने पुराने नोट पर समितियों को खाद-बीज के विक्रय पर रोक लगा दी है। ऐसे में किसानों के सामने भारी परेशानी खड़ी हो गई है।

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नहीं दिया खाद-बीज

किसान दीनदयाल विश्वकर्मा, किशन लाल पटेल, राजा राम साहू, राजेश रजक,दद्दी तिवारी ने बताया कि प्राथमिक कृषि सहकारी समिति बरगी में खाद-बीज के लिए पांच सौ नोट लेकर गए थे। सेल्समैन ने नोट लेने से मना कर दिया।

किसानों को लौटाया

पुराने पांच सौ के नोट से खाद-बीज के लिए अन्य समितियों में किसान भटकते रहे। सेल्समैन ने किसानों को उल्टे पांव लौटा दिया। घाटसिमरिया, लीड सिहोरा, नुंजी, फनवानी, मझगवां, सेलवारा, तलाड़, पौड़ा, कछपुरा, बेला, गाधीग्राम, सहजपुरा, मझोली, खाड़ में किसानों को पुराने पांच सौ के नोट पर खाद और बीज नहीं मिला।

इनका कहना है कि

समितियों में पांच सौ के पुराने नोट लेकर खाद-बीज देने के निर्देश नहीं मिले हैं। यदि हम मजबूरी में नोट ले भी ले तो संबंधित बैंक ये नोट जमा नहीं करेगा।
रोहित बघेल, जिला विपणन अधिकारी जबलपुर

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