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अधारताल-गोरखपुर तहसीलों को नसीब नहीं खुद के भवन, अटके नई तहसीलों के भवन

अधारताल-गोरखपुर तहसीलों को नसीब नहीं खुद के भवन, अटके नई तहसीलों के भवन

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tehsil building in jabalpur

जबलपुर। शहरी क्षेत्र की तीनों नई तहसीलों का अपना कार्यालय दो साल बाद भी नहीं बन पाया है। अधारताल व गोरखपुर तहसीलों के लिए जमीन की तलाश चल रही है। रांझी तहसील के लिए जमीन चिन्हित होने पर भी नए भवन की नींव तक नहीं पड़ी। ऐसे में यह तहसीलें किराए के भवनों में चल रही हैं। वहां सभी सुविधाएं नहीं होती। खुद तहसीलों के अधिकारी-कर्मचारी व्यवस्थाओं के लिए परेशान रहते हैं।

रांझी में जमीन मिलने के बाद भी नहीं बना कार्यालय

जब भी शासन को किसी योजना के लिए जमीन चाहिए होती है तो सबसे पहले रिकॉर्ड संबंधित तहसील से निकलवाना पड़ता है। यानी जमीन का पूरा लेखा-जोखा तहसीलों में होता है। फिर भी अपने कार्यालय के लिए इनके द्वारा जमीन नहीं तलाशी जा सकी। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि कोई तहसीलदार यदि जमीन तलाशता है तो उसका स्थानांतरण दूसरी तहसील में हो जाता है। इसके बाद उस प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया जाता बल्कि नया प्रस्ताव तैयार होने लगता है।

कौन सा कार्यालय कहां
रांझी- इस तहसील के लिए रांझी अस्पताल मार्ग पर जमीन चिन्हित है। लेकिन अभी तक इसका निर्माण प्रारंभ नहीं हुआ। यह अभी इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल के पास खाली भवन में चल रही है। पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण एसडीएम अभी तक कलेक्टर कार्यालय में बैठ रही हैं। ऐसे में लोगों को आधा काम रांझी तो आधा कलेक्टे्रट में कराना पड़ता है।

अधारताल- विजय नगर हाट बाजार में जेडीए के कमरों में यह तहसील बीते करीब दो सालों से चल रही है। ऐसे में कार्य में एकरूपता नहीं आ पाती। यह भवन भूल भुलैया की तरह हैं। यहां मूलभूत सुविधाएं मुश्किल से मिलती हैं। बड़ी बात यह है कि लोगों को यहां तक पहुंचने के लिए कई जगह पूछताछ करनी पड़ती है।

गोरखपुर- इस तहसील का क्षेत्र आधे शहर के अलावा भेड़ाघाट तक लगा है। लेकिन यह ऐसी जगह चल रही है, जहां सार्वजनिक परिवहन की दिक्कत है। विद्युत मंडल के तरंग प्रेक्षागृह के पास चल रही है। वहां भी कम कमरे हैं। ऐसे में संचालन में परेशानी जाती है। पूर्व में यह कार्यालय नया गांव के पास चलता था।

मुख्यालय के चयन में अटकी बरगी तहसील
जिले की 11वीं तहसील बरगी को बनाया जाना है। इसके गठन का पहला प्रकाशन कांग्रेस के शासनकाल में हो चुका है। शहपुरा और बरगी के गांवों का बंटवारा भी हो गया। करीब 114 गांव इसमें शामिल किए जाने थे। लेकिन अब तहसील के मुख्यालय को लेकर विवाद बना हुआ है। यह विषय विधानसभा में कई बार उठाया जा चुका है। कभी मुख्यालय घाना तो कभी बरगी को बनाने पर विचार हुआ। ऐसे में बार बार प्रस्ताव बदलता है। हालांकि अब बरगी में तहसील कार्यालय के लिए सहमति बनती दिख रही है। यदि सब ठीक रहा तो जल्द ही यह तहसील गठित हो जाएगी।

तहसील भवन के लिए तीन जगहों को चिन्हित किया गया है। आगामी एक सप्ताह के भीतर इसका निर्णय हो जाएगा।
- अनूप श्रीवास्तव, तहसीलदार गोरखपुर

शहर में एक जगह को तहसील कार्यालय कार्यालय के लिए चिन्हित कर उसका प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजा है।
- राजेश सिंह, तहसीलदार, अधारताल