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जबलपुर

मालगाड़ी से अब एक घंटे में उतरेगी 1200 बोरियां

मालगोदाम हुआ ऑटोमेशन तकनीक से युक्त, आधुनिक मशीनों से होगी अब लोडिंग-अनलोडिंग, जबलपुर रेल मंडल बना पहला मंडल

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जबलपुर. पश्चिम मध्य रेलवे के कछपुरा मालगोदाम को अब फुली ऑटोमेटिक कर दिया गया है। अब बोरियों के उतारने चढ़ाने की व्यवस्था मशीनीकृत कर दी गई है। जोन का यह पहला स्टेशन बन गया है जहां इस तरह की यांत्रिकीकृत व्यवस्था उपलब्ध कराई गई। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाली विभिन्न सामग्रियों की बोरियों को मानवीकृत हम्मालों के सहयोग से उतारा और चढाया जाता है। अब नई तकनीक से मानवश्रम बचेगा तो वहीं समय की भी बचत होगी। गौरतलब है कि पश्चिम मध्य रेलवे में 26 मालगोदमों और 3 रेलवे साइडिंग सहित कुल 29 गुड्स शेड हैं जिनके माध्यम से चौबीस घंटे लोडिंग और अन लोडिंग चलती है।
पहली रैक कन्वेयर मशीन

बताया जाता है अब आधुनिक मालगाड़ी के रैक से मालगाडि़यो के रैक से अब एक घंटे में 1200 बोरियों की लोडिंग और अनलोडिंग की जा सकेगी। बुधवार को पहला रैक कन्वेयर मशीन के द्वारा माल उतारने का कार्य शुरू किया गया। जबकि हम्मालों के द्वारा यही कार्य करने में करीब 5 से 6 घंटे लग जाते थे। जिसके कारण रैकों को भी अनायस घंटो खड़ा रहना पड़ता था। वहीं डेमरेज लगने की भी संभावना बनी हुई रहती थी। हर माह करीब 1400 से 1500 बोगी आती है।
गेहूं, चावल, सीमेंट आदि लोड
जानकारों के अनसुार मालगोदाम में गेहूं, चावल, खाद , सीमेंट आदि कंसाइनमेंट रैकों के माध्यम से पहुंचते हें। मालगोदाम के आधुनिकीकरण किए जाने से अब व्यापारियों को माल गोदाम में माल को रोकने के लिए दिए जाने वाले शुल्क से भी मुक्ति मिलेगी और तेजी से लदान एवं उतरान का कार्य हो सकेगा। होगी क्योंकि साइडिंग खाली न रहने के कारण रैकों को डिले करना पड़ता है जिससे व्यापारियों को भी नुकसान होता है।

-जबलपुर मंडल में इस तरह की व्यस्था अभी तक उपलब्ध नहीं थी। आटोमेशन के मामले में यह पहला स्टेशन बन गया है। आज से ही हमने इसकी शुरुआत कर दी है।
-विश्वरंजन, सीनियर डीसीएम रेलवे