ऑनलाइन टीचिंग पर हाईकोर्ट की इस व्यवस्था ने विरोधियों को दिया बल

-मध्य प्रदेश में ऑनलाइन टीचिंग का कुछ लोग कर रहे हैं विरोध

By: Ajay Chaturvedi

Published: 25 Aug 2020, 01:10 PM IST

जबलपुर. प्रदेश में ऑनलाइन टीचिंग के विरोध पर हाईकोर्ट करेगा सुनवाई। इस संबंध में दायर जनहित याचिका को सुनवाई के लिए कोर्ट ने मंजूर कर लिया है। अब फीस वाले मामले के साथ ऑनलाइन टीचिंग के मुद्दे को भी सुना जाएगा।

बता दें कि जनहित याचिका दायर करने वाले ने हाईकोर्ट में संशोधन आवेदन के जरिए राज्य शासन द्वारा निजी स्कूलों को ऑनलाइन पढ़ाई की अनुमति दिए जाने का विरोध किया है। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार मित्तल व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने सोमवार को सभी पक्षकारों को आगामी सुनवाई तक अपने जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने वह अंतरिम आदेश भी बराकरार रखा है, जिसके जरिए कोरोना काल में फीस जमा न करने पर संबंधित छात्र-छात्रा का नाम काटने पर रोक लगा दी गई थी। यही नहीं राज्य शासन के आदेशानुसार सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली की व्यवस्था भी यथावत रखी गई है। अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी।

गौरतलब है कि निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से वसूली जा रही फीस को लेकर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे व रजत भार्गव की ओर से दायर जनहित याचिका में यह मुद्दा उठाया गया कि इंदौर हाईकोर्ट और जबलपुर हाईकोर्ट की एकलपीठों ने निजी स्कूलों द्वारा फीस वसूली को लेकर दो अलग-अलग आदेश दिए हैं। इसके चलते विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई निजी स्कूल मनमानी फीस वसूल रहे हैं, जबकि कुछ सरकार के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने दलील दी कि प्रदेश भर में निजी स्कूल ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से पढ़ाई संचालित कर रहे हैं, लेकिन भारी भरकम ट्यूशन फीस का स्ट्रक्चर तैयार कर अभिभावकों को लूटा जा रहा है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश और हाईकोर्ट द्वारा मंजूर संशोधन आवेदन के जरिए राज्य सरकार की ओर से निजी स्कूलों को ऑनलाइन क्लासेस संचालित करने की अनुमति को चुनौती दी गई। अधिवक्ता उपाध्याय ने तर्क दिया कि ऑनलाइन क्लासेस से छात्र-छात्राओं की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। आंखों और दिमाग पर अतिरिक्त जोर पड़ने से बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। अधिवक्ता अमित सिंह की ओर से अधिवक्ता अतुल जैन ने भी तर्क दिया कि निजी स्कूलों को मान्यता भौतिक कक्षाएं संचालित करने की मिली है, ऑनलाइन क्लासेस का संचालन गलत है। संशोधन स्वीकार कर सभी पक्षों की सहमति से कोर्ट ने सुनवाई बढ़ा दी।

हाई कोर्ट के पूर्व निर्देश के पालन में सीबीएसई की ओर से अपना जवाब पेश किया गया, जिसमें राज्य शासन के सिर्फ ट्यूशन फीस वसूली के आदेश को उचित ठहराया गया। साथ ही साफ किया गया कि निजी स्कूलों को मान्यता कमर्शियल यूज के लिए नहीं दी गई है। लिहाजा, मनमानी फीस वसूली ठीक बात नहीं है।

Ajay Chaturvedi
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned