ऑक्सीजोन की जगह तान दीं इमारतें, कॉलोनाइजर पर सिस्टम मेहरबान
जबलपुर . शहर में गगनचुंबी इमारतें तो बनती जा रही हैं लेकिन कॉलोनियों से ऑक्सीजोन गायब हो रहे हैं। दरअसल बड़ी संख्या में रिहायशी कॉलोनियों में ग्रीन बेल्ट की जमीन छोड़ी नहीं गई है। कुछ इलाके ऐसे हैं जहां खाली जमीन पर उद्यान विकसित नहीं किए गए। भूमि विकास निगम के अनुसार किसी भी टाउनशिप या कॉलोनी के विकास में ग्रीन बेल्ट के लिए न्यूनतम दस प्रतिशत जमीन छोड़ा जाना अनिवार्य है। लेकिन भू कारोबारियों पर नगर निगम से लेकर जिला प्रशासन इस तरह मेहरबान है की कालोनियों से ऑक्सीजोन गायब होते जा रहे हैं।
#AvaidhColony उद्यान के लिए नहीं छोड़ी जमीन, बेतरतीब विकसित हो रहीं टाउनशिप
अवैध कॉलोनियों में गड़बड़झाला
दरअसल जिम्मेदार प्रशासनिक विभागों ने ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बनाई है की अवैध कॉलोनी चिन्हित होने पर उनमें रजिस्ट्री पर रोक लगाई जा सके। जेडीए, हाउसिंग बोर्ड ने जिस इलाके में कालोनियां विकसित की हैं उनमें तो उद्यान है या फिर ग्रीन बेल्ट के लिए जमीन सुरक्षित की गई है। इसी तरह से रियल एस्टेट के बड़े समूहों ने भी ज्यादातर टाउनशिप में ग्रीन बेल्ट विकसित किए हैं। वहीं रांझी, मानेगांव, मोहनिया, गोहलपुर, कुदवारी, अधारताल, ग्वारीघाट, गढ़ा, पुरवा, शास्त्री नगर समेत शहर के अन्य रिहायशी इलाकों में कई अवैध कॉलोनी हैं। इनमें प्लाट या निर्मित भवन बेचने के लिए लोगों को उद्यान से लेकर अन्य सुविधाओं के सपने तो दिखाए गए, लेकिन ग्रीन बेल्ट की जमीन नहीं छोड़ी गई है।
बच्चों को खेलने के लिए जगह नहीं
गुजराती कॉलोनी, चंदन कॉलोनी, पुराना शास्त्री नगर, बाल सागर, जागृति कॉलोनी समेत बड़ी संख्या में कॉलोनियों में उद्यान, ग्रीन बेल्ट के लिए जगह नहीं है। इसके कारण यहां बच्चों के खेलने के लिए भी पर्याप्त स्थान नहीं हैं।
यह है स्थिति
79 वार्ड हैं निगम के
650 से ज्यादा कॉलोनी शहर में
196 अवैध कॉलोनी हैं
350 के लगभग हैं उद्यान
100 स्थान पर जमीन खाली
200 स्थानों पर उद्यान नहीं
पंजीयन अधिनियम व मुद्रांक अधिनियम के अनुसार जमीन की रजिस्ट्री के लिए किसी प्रकार की रोक नहीं है, लेकिन अगर निर्धारित किसी खसरा बटांक को लेकर नगर निगम की ओर से सूचित किया जाएगा की जमीन ग्रीन बेल्ट मद की है तो ऐसी जमीन की रजिस्ट्री नहीं की जाएगी।
- पवन अहिरवाल, वरिष्ठ पंजीयक, रजिस्ट्री विभाग
भूमि विकास नियम के अनुसार स्वच्छ हवा से लेकर स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए रिहायशी कॉलोनियों में 10 प्रतिशत जमीन ग्रीन बेल्ट के लिए छोड़ा जाना चाहिए। यहां पर उद्यान भी विकसित किए जाना चाहिए।
- संजय वर्मा, स्ट्रक्चर इंजीनियर