नरवाई की आग में जल रही पान की खेती, हो रहा भारी नुकसान
जबलपुर। सरकार और कृषि विभाग के अधिकारियों की तमाम समझाइश इसके बाद भी किसान धान की पराली (नरवाई) में आग लगाने से नहीं चूक रहे हैं। पराली में आग लगाने से खेत तो बंजर हो ही रहे हैं। साथ ही गांधीग्राम के आसपास पान बरेजों में आग लगने का खतरा मंडरा रहा है। हालत यह है कि पान की खेती करने वाले किसान खेतों में आग लगते ही घबरा जाते हैं। उनकी रातों की नींद उड़ गई है।
राष्ट्रीय राजमार्ग 30 हाईवे पर गांधीग्राम, बाईपास, देव नगर, माल्हा, धरमपुरा और बम्होरी में अनेक पान बरेजे हैं। रात के समय किसान धान कटने के बाद गेंहू की जल्दी बोवनी के चक्कर में नरवाई में आग लगा देते हैं। भूपेंद्र चौरसिया, रवि चौरसिया, राम विशाल, खेमचंद, नरेश चौरसिया ने बताया कि रात में मिढासन, केलवास और उमरिया गांव की तरफ आसमान से आज की लपटें उठती दिखती है तो पान कृषक पान बरेजों को देखते रात में दौड़ लगा देते हैं।
ये करें किसान
स्ट्रिपर यंत्र का उपयोग कर पराली से भूसा तैयार कर सकते हैं
धान की कटाई के दौरान किसान नीचे से कटाई करें
कृषि वेटर यंत्र का उपयोग करें, इससे ठूंठ और डंठल की कटिंग होती है
बांस, घास और बल्ली के बरेजों में आग लगने का रहता है खतरा
रात में लगा दी जाती है आग
पान कृषकों का कहना है कि उक्त ग्रामों में रात में आग लगा दी जाती है। उन्हें अपने पान बरेजों को देखने के लिए भागना पड़ता है। पान बरेजों का निर्माण बांस, घास और लकड़ी की पतली बल्लियों से होता है। थोड़ी सी आग से पान बरेजे पूरी तरह जलकर खाक हो सकते हैं।
पर्यावरण को भी होता है नुकसान
पराली में आग लगाने की वजह से वायुमंडल में धुआं फैल जाता है। उसे प्रकृति चक्र में बदलाव के कारण पर्यावरण को भारी नुकसान होता है। पराली में आग लगाने की वजह से कई घटनाएं हो चुकी हैं। इसके साथ ही आग लगाने के कारण खेतों की उर्वरा शक्ति खत्म हो रही है। इसके बाद भी कई किसान यह लापरवाही कर रहे हैं।