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ग्लोबल पेरेंट्स डे-इन बच्चों की कामयाबी में पेरेंटस का सबसे ज्यादा योगदान, सुनिए उन्हीं की मुहजुबानी

शहर के भी कई ऐसे यंग अचीवर्स हैं, जिन्होंने पैरेंट्स के भरोसे के दम ही कामयाबी की उड़ान भरी है।

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Parents contribution most to the success of children

Parents contribution most to the success of children

जबलपुर । शहर के भी कई ऐसे यंग अचीवर्स हैं, जिन्होंने पैरेंट्स के भरोसे के दम ही कामयाबी की उड़ान भरी है। इतना ही नहीं अब ये होनहार भविष्य में अपने पैरेंट्स के सपनों को पूरा करने में भी जुट गए हैं। इस ग्लोबल पैरेंट्स डे के मौके पर आइए मिलते हैं शहर के कुछ ऐसे ही होनहारों से


आइटी पार्क में सबसे पहले शुरू किया काम
शहर के अवधेश सोलंकी स्टार्टअप और बिजनेस से जुड़े हुए हैं, वहीं कामयाबी का मंत्र पैरेंट्स को मानते हैं। इंजीनियर बाबू के स्टार्टअप के जरिए मुकाम हासिल करने वाले अवधेश ने बताया कि साल 2013 में पापा का साथ छूटा, तब से मां ही उनके लिए पिता भी रही हैं। हर कदम पर एक पिता की तरह ही मां से सपोर्ट करते हुए समझाया। अवधेश बताते हैं कि बाहर जॉब लगने के कारण मां यहां अकेली रहती थी, लेकिन हमेशा कहती थी खुद की कम्पनी बनना। उनके भरोसे के कारण ही जबलपुर में आईटी पार्क में सबसे पहले अवधेश की कम्पनी ने ही काम शुरू किया।


माता-पिता का सपना है आइएएस बनूं
शहर के नावेद अंसारी जिन्होंने दसवीं की परीक्षा में प्रदेश स्तर पर संस्कारधानी का नाम रोशन किया है। वे अपने माता-पिता को जीवन का सबसे बड़ा मोटिवेटर के रूप में मानते हैं। 98.4 प्रतिशत हासिल करके प्रदेश में चौथा स्थान हासिल करने वाले नावेद ने बताया कि पिता मो. जहीर और मां जरीरा बेगम की उनके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं। एग्जाम के बीच भी वे हमेशा कहते थे कि और माक्र्स लाओ। यह सब उनका भरोसा ही था, इसलिए ही बोर्ड एग्जाम में प्रदेश में टॉप किया। पैरेंट्स का सपना है आईएएस अफसर बनूं, जिसके लिए नावेद पूरी तरह से जुट गए हैं।


पापा कहते हैं दूसरों की हमेशा मदद करो

एमपीपीएससी टॉपर रही सम्पदा सराफ उन युवाओं में से हैं, जिनके लिए उनके माता-पिता ही रोल मॉडल रहे हैं। सम्पदा ने बताया कि पापा आदेश सराफ और मम्मी नंदिनी सराफ दोनों की गवर्नमेंट जॉब में होने के कारण हमेशा गवर्नमेंट सेक्टर में जाने की तमन्ना बनी रही। पापा ने भी हमेशा यह ही सिखाया है कि हमेशा दूसरों की मदद ही करना। स्कूल के टाइम पर जब एग्जाम होते थे, तब रात में 12 बजे भी मां दूध गर्म करके देती थी, वहीं रात में 2 बजे भी उठकर देखा करती थी। दूसरी तरह बड़ा भाई अनिमेष भी छोटे-मम्मी पापा से कम नहीं है, जिसने हमेशा मोटिवेट किया है।

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