
pearl farming
वीरेन्द्र रजक@जबलपुर। देशभर में मशहूर और मोती के सबसे बड़े बाजार हैदराबाद और जयपुर में अब छिंदवाड़ा के तालाब में पैदा हो रहे डिजाइनर मोती बिकेंगे। दोनों शहरों के व्यापारी इन्हें खरीदने के बाद विदेशों में भी एक्सपोर्ट करेंगे। पूरी तरह से प्राकृतिक इन डिजाइनर मोतियों की पहली खेप छिंदवाड़ा के चंदनगांव स्थित कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा आगामी जुलाई से अगस्त माह के बीच राजस्थान के सवाईमाधोपुर की एक फर्म को प्रदान की जाएगी। यह कृषि केंद्र जबलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संचालित है। जानकारी के अनुसार संस्था की ओर से प्रति मोती सौ रुपए का भुगतान किया जाएगा।
जेएनकेविवि के छिंदवाड़ा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र चंदनगांव में की जा रही फार्मिंग
जयपुर-हैदराबाद में शोरूम की शान होंगे छिंदवाड़ा में बनाए जा रहे डिजाइनर मोती
10-12 हजार करोड़ रुपए का प्रति वर्ष कारोबार होता है देश में
100 रुपए से 10 हजार रुपए तक है मोती की कीमत
138 देशों में होता है एक्सपोर्ट
58 देशों से होता है इम्पोर्ट
विदेशों में भी होंगे एक्सपोर्ट
विदेशों में मोती की काफी मांग है। देश में भी डिजाइनर ज्वेलरी समेत माला, रत्न और सजावट के सामान में मोती का काफी उपयोग किया जाता है। जानकारी के अनुसार प्रतिवर्ष भारत में मांग के अनुरूप 70 प्रतिशत मोती का आयात होता है। इसका 28 प्रतिशत केवल गुजरात राज्य के व्यापारी मंगाते हैं। जानकारों के अनुसार यदि देश में मोती की खेती इसी प्रकार बढ़ती रही, तो आने वाले कुछ वर्षों में विदेशों से आयात किए जाने वाले मोती का प्रतिशत 40 से 50 तक पहुंच जाएगा। विदेशों में निर्यात किए जाने वाले मोती के ग्राफ में भी 20 से 25 प्रतिशत तक का इजाफा होगा।
जानकारी के अनुसार कुछ समय पूर्व तक ओडिशा की सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्वाकल्चर भुवनेश्वर में मोती की खेती का प्रशिक्षण दिया जाता था, लेकिन अब देश में कई सरकारी और गैर सरकारी संस्थान इसका प्रशिक्षण दे रहे हैं। इतना ही नहीं मोती की खेती का व्यवसाय शुरू करने पर अलग-अलग प्रदेशों समेत केन्द्र द्वारा सब्सीडी भी प्रदान की जा रही है।
ऐसे होती है मोती की खेती
- मोती की खेती के लिए अनुकूल समय अक्टूबर से दिसंबर तक होता है
- 100 बाई 80 बाई 12 फीट या बड़े आकार के तालाब में मोतियों की खेती की जा सकती है।
- मोती संवर्धन के लिए 0.4 हेक्टेयर जैसे छोटे तालाब में अधिकतम 15000 सीप से मोती उत्पादन हो सकता है।
- तालाब, नदी आदि से सीपों को एकत्र करना या खरीदना।
- सीप में छोटी-सी शल्य क्रिया और सीप को बंद करना।
- सीपों को नायलॉन बैग में दो दिनों तक एंटी-बायोटिक और प्राकृतिक चारे पर रखना। निरीक्षण कर मृत सीपों को हटाना।
- जीवित सीपों को नायलॉन बैगों में रखकर (दो सीप प्रति बैग) बांस के सहारे तालाब में लटकाना।
- 12 से 13 माह में मोती हो जाते हैं तैयार
डिजाइनर मोती की मांग बाजार में अधिक है। हम पांच डिजाइन में मोती तैयार कर रहे हैं। ये मोती जुलाई अगस्त तक तैयार हो जाएंगे। पहली खेप राजस्थान के सवाईमाधोपुर की एक फर्म द्वारा खरीदा जाएगा। जो इसे देश में बेचने के साथ ही एक्सपोर्ट भी करेगी। यह स्टार्टअप के तौर पर भी शुरू किया जा सकता है। इस व्यवसाय में अच्छा लाभ है।
- चंचल भार्गव, कार्यक्रम सहायक (पादप प्रजनन एवं अनुवांशिकी), जेएनकेविवि, कृषि विज्ञान केंद्र, चंदनगांव, छिंदवाड़ा
देश में मोती का कारोबार हर साल 10- 12 हजार करोड़ रुपए है। हाल ही में डिजाइनर मोतियों की मांग बढ़ी है। कई देशों से मोती एक्सपोर्ट किया जाता है, वहीं कई देशों से हम इम्पोर्ट करते हैं। पूरे विश्व में मोती का बाजार बढ़ रहा है।
- मनु अग्रवाल, रत्न विशेषज्ञ, जबलपुर
Published on:
02 Mar 2022 04:24 pm

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