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सावधान!अस्पतालों में पैसा लेकर घूम रहे पर नहीं मिल रहा बेड, घर पर रहें वरना पड़ेगा महंगा

अस्पतालों में बेड के लिए खत्म नहीं हो रही मारामारी, अब रेपिड टेस्ट की भी किल्लत

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Patients compelled to lie on the floor in the ward of potential patients of Covid-19 in the district hospital.

जिला अस्पताल में कोविड-19 के संभावित मरीजों के वार्ड में फर्श पर लेटकर इलाज को विवश मरीज.

जबलपुर। शहर में कोरोना के जारी कहर और लगातार संदिग्ध एवं संक्रमित मरीज बढऩे से जांच तथा उपचार के संसाधन कम पडऩे लगे है। गम्भीर कोरोना मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए खाली बिस्तर की मारामारी बुधवार को भी बनी रही। ऑक्सीजन बेड के लिए मरीज अस्पतालों के चक्कर काटते रहे। सरकारी फीवर क्लीनिकों में कोविड रेपिट एंटीजन टेस्ट किट का टोटा हो गया। इससे समय से पहले ही फीवर क्लीनिक में कोरोना संदिग्धों की स्क्रीनिंग बंद हो गई। घंटों भटकने के बाद संदिग्धों को बिना जांच के घर लौटना पड़ा। संदिग्ध की जांच करके संक्रमित की जल्दी पहचान नहीं होने से संक्रमण के फैलाव का खतरा बढ़ गया है।

फीवर क्लीनिक में किट की कमी के कारण कोरोना जांच के लिए भटक रहे संदिग्ध

पहले ही कम थी, अब और समस्या बढ़ गई
जिले में कोरोना संक्रमित की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उनके सम्पर्क में आने वाले संदिग्ध उससे ज्यादा संख्या में बढ़ रहे है। इसके मुकाबले सरकारी फीवर क्लीनिक में पहले ही रैपिड एंटीजन टेस्ट की किट कम है। प्रत्येक फीवर क्लीनिक को औसतन 50 से 75 किट की प्रतिदिन उपयोग के लिए दी जा रही थी। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह भी बुधवार को कई फीवर क्लीनिक में समाप्त हो गई। जिला अस्पताल में भी रैपिड एंटीजन टेस्ट किट की कमी बताकर कई व्यक्तियों के नमूने जांच के लिए नहीं लिए। जानकारी के अनुसार उन्हें गुरुवार को आने का कहकर लौटा दिया गया।

जांच में देर से आरटीपीसीआर कम
जिले में सरकारी अस्पतालों में कोरोना संदिग्ध के आरटीपीसीआर टेस्ट के ज्यादातर नमूने जांच के लिए एक निजी कम्पनी की लैब में भेजे जाते है। इस कम्पनी के पास पहले ही नमूने का ओवरलोड है। कोरोना जांच की रिपोर्ट चार से पांच दिन बाद संबंधित को मिल पा रही है। इसके कारण रैपिड एंटीजन टेस्ट के मुकाबले आरटीपीसीआर टेस्ट के लिए नमूने फीवर क्लीनिक में पहले ही कम लिए जा रहे थे।

893 रेमडेसीविर इंजेक्शन भी कम पड़े
प्रशासन ने बुधवार को 53 अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए कुल 893 रेमडेसीविर इंजेक् शन आवंटित किए। इससे गम्भीर कोरोना मरीजों को कुछ राहत मिली। लेकिन अस्पतालों में भर्ती गम्भीर कोरोना मरीजों की संख्या और मांग के मुकाबले यह इंजेक्शन भी कम पड़ गए। कई जरुरतमंद गम्भीर मरीज इंजेक् शन के लिए भटकते रहे।

सुपर स्पेशलिटी में मरीज का डायलिसिस
मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में कोरोना मरीजों के साथ ही उनकी अन्य बीमारियों का उपचार भी किया जा रहा है। बुधवार को कोविड वार्ड में भर्ती एक मरीज का अस्पताल में डायलिसिस किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी तक अस्पताल में 189 कोरोना मरीज का डायलिसिस हुआ है।