कोरोना इलाज का पैकेज, मोटी फीस हुई फेसबुक पर ट्रोल, तो प्राइवेट अस्पतालों ने लौटाए कोरोना मरीज

कोरोना इलाज का पैकेज, मोटी फीस हुई फेसबुक पर ट्रोल, तो प्राइवेट अस्पतालों ने लौटाए कोरोना मरीज

By: Lalit kostha

Published: 05 Sep 2020, 01:54 PM IST

जबलपुर। कोविड उपचार के लिए मोटी फीस वसूली को लेकर निशाने पर आए कुछ प्राइवेट अस्पतालों ने शुक्रवार को नए मरीज भर्ती नहीं किए। संक्रमितों के परिजनों से पूछताछ की तो बिस्तर खाली नहीं होने का हवाला देकर उन्हें लौटा दिया। कोविड उपचार के लिए कुछ अस्पताल के संचालकों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक मनमर्जी से शुल्क तय करने के बाद से कई सवाल उठ रहे है। इसे लेकर हो रही आलोचना से कोविड उपचार करने वाले अस्पतालों के संचालक नाराज है। बताया जा रहा है कि एक निजी अस्पताल के संचालक ने कोविड के नए मरीज भर्ती नहीं करने की सूचना जारी कर दी है।

डॉक्टर भोपाल में भर्ती
सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था और निजी अस्पतालों में नो रूम होने के चलते एक कोरोना संक्रमित चिकित्सक को उपचार के लिए भोपाल जाना पड़ा। बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले परिवार सहित संक्रमित मिले डॉक्टर होम आइसेालेशन पर थे। गुरुवार को अचानक तबियत बिगडऩे के बाद परिजनों ने सम्पर्क किया। उसके बाद भोपाल के निजी अस्पताल में उन्हें भर्ती किया गया है। एक अन्य वृद्ध मरीज जिसे कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया, वे वहां अव्यवस्था से परेशान हो गए। परिजनों ने उनका निजी अस्पताल में उपचार कराने का मन बनाया। निजी अस्पताल में जगह नहीं मिलने पर मरीज को भोपाल लेकर गए।

 

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यहां सहकर्मी की कोरोना से मौत पर आरआई और पटवारियों में आक्रोश
कोरोना और निमोनिया से पीडि़त एक आरआई की मौत पर जिले के राजस्व निरीक्षक और पटवारियों में भारी आक्रोश है। उन्होंने कलेक्टर कर्मवीर शर्मा से शुक्रवार को मुलाकात की। उनका कहना था कि आरआई मेडिकल कॉलेज कोविड केयर सेंटर में भर्ती थे। उन्होंने फोन और सोशल मीडिया संदेश के माध्यम से सभी अधिकारियों को अवगत कराया था कि उन्हें निमोनिया है। उनको इलाज ठीक से नहीं मिल रहा है। ऑक्सीजन का पानी तक बदलने वाला कोई नहीं है।
राजस्व निरीक्षक संघ के अध्यक्ष राजेंद्र सेन और पटवारी संघ के अध्यक्ष जागेंद्र्र पीपरे ने कलेक्टर से शिकायत में कहा कि राजस्व अमला पूरे कोरोना काल में मुस्तैदी के साथ काम कर रहा है। जब कोई अधिकारी या कर्मचारी कोरोना का शिकार हो रहा है तो उसे ठीक से इलाज भी नहीं मिल रहा है। उनका कहना था कि इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए।
इस बीच कलेक्टर ने उन्हें आश्वासन दिया कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच की जाएगी। अपर कलेक्टर हर्ष दीक्षित जांच कमेटी के प्रमुख होंगे। उनकी निगरानी में यह जांच पूरी की जाएगी। यदि हमारी मांगों को अनसुना किया गया तो काम बंद भी करेंगे। इसकी सूचना हमारे राज्य स्तरीय संघ को भी दी गई है।

Lalit kostha Desk
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