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गर्मी में क्विक वॉटरिंग देगी राहत…ये ले सकते हैं फायदा

राहत भी देगी

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pet ki bimari

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जबलपुर, गर्मी शुरू हो गई है, आम हो या खास सभी को पानी की अधिक आवश्यकता पड़ रही है, एेसे में सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है, उन लोगों को जो ट्रेनों में सफर करते हैं। कई बार ट्रेनों की कोचों में पानी न होने के कारण हंगामे और विवाद जैसी स्थिति बन जाती थी और यात्रियों को बिना पानी के यात्रा करना पड़ता था, लेकिन अब एेसा नहीं होगा।
गर्मी के दिनों में ट्रेनों में यात्रा करने वालों को अब राहत मिलेगी, क्योंकि उन्हें यात्रा के दौरान कोच में पर्याप्त पानी मिल सकेगा। कारण है, कोचों में पानी भरने के लिए क्विक वॉटरिंग तकनीकी। जल्द ही जबलपुर समेत देश के ६६ रेलवे स्टेशनों पर इस प्रणाली से जुड़े सिस्टम इंस्टॉल कर दिए जाएंगें। जिसके बाद चंद पलों में कोचों में पानी भर जाएगा। एेसा माना जा रहा है कि आने वाले कुछ समय में यह व्यवस्था जबलपुर रेलवे स्टेशन पर शुरू भी हो जाएगी।
एेसे करता है काम

ट्रेनों में पानी भरने का यह सिस्टम पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत है। टंकी में पानी भरने के लिए बूस्टर पंप लगाए जाएंगें। बूस्टर पंप एक मिनट में 200 लीटर पानी भरेगा। जिससे मात्र छह मिनिट में १८०० लीटर की कोच की पानी की टंकी भर जाएगी। जबकि पुरानी व्यवस्था में हाथ से पाइप लगाने पर एक मिनिट में महज ५० लीटर पानी ही टंकी तक पहुंच पाता था। जिससे टंकी फुल नहीं होती थी और यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
इन स्टेशनों पर भी होगी व्यवस्था

जबलपुर समेत क्विक वाटरिंग सिस्टम इटारसी, भोपाल, हबीबगंज और कटनी रेलवे स्टेशनों पर भी इंस्टॉल किया जाएगा। इस योजना के लिए रेलवे ने २.३० अरब रुपए मंजूर किए हैं। रेलवे बोर्ड के उपनिदेशक मनीष तिवारी ने जल्द से जल्द इस योजना पर कार्य करने के निर्देश भी सभी जोनों को दे दिए हैं।
गर्मी में होती थी परेशानी

गर्मी के दिनों में कोच में पर्याप्त पानी न होने के कारण कई बार ट्रेनों में हंगामे की स्थिति बन जाती थी। कभी यात्री चैन पुलिंग कर देते थे, जो कभी कभी उन लाइनों पर ट्रेन नहीं आती थी, जहां से पानी की सप्लाई कोचों पर होती है, एेसे में ट्रेनों में पानी नहीं भर पाता था और बिना पानी के ही कोचें रवाना करनी पड़ती थीं।
वॉल्व मैन नहीं खोलेग वॉल्व

वर्तमान व्यवस्था में जब ट्रेन प्लेटफार्म पर आती है, तो पाइप लगाने के बाद वॉल्व मैन द्वारा वॉल खोले जाते हैं। यह वॉल्व सभी प्लेटफार्म पर लगे पाइप लाइनों से जुड़े होते हैं, जिस कारण प्रेशर कम होता है। लेकिन नई व्यवस्था पूरी तरह कंप्यूटरीकृत होगी और उसी प्लेटफार्म की पाइप लाइन चालू होगी, जहां ट्रेन है। इतना ही नहीं टंकी भरते ही यह ऑटोमैटिक बंद भी हो जाएगी।